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Wednesday, January 28, 2026

मिशन शक्ति के नाम पर शर्मनाक खेल! पहले बेटी को पीट-पीट कर गाड़ी में डाला फिर सिपाही से तहरीर लेकर लिख दिया गया मुकदमा

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– युवती से दुर्व्यवहार, भाई को पीटा, फिर झूठी कहानी गढी, जिले में महिला पुलिस कप्तान फिर भी महिला की सरे बाजार हुई पिटाई
– रोडवेज चौकी पर पुलिस की दबंगई
– पहले युवती से बदसलूकी, फिर भाई की बेरहमी से पिटाई
– कांस्टेबल से लिखवाई गई मनगढ़ंत तहरीर
– महिला थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप
– महिला आयोग और मुख्यमंत्री तक जाएगा मामला
संदीप सक्सेना

फर्रुखाबाद: प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति अभियान की सच्चाई बुधवार दिन के दो बजे उस समय सामने आ गई, जब रोडवेज बस अड्डा चौकी पर पुलिस द्वारा एक नाबालिग युवती और उसके भाई के साथ की गई बर्बरता की परतें खुलने लगीं। पुलिस के मुताबिक रोडवेज बस अड्डे पर कांस्टेबल यशवीर सिंह ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान उसने प्रशांत राजपूत पुत्र विनोद कुमार को एक नाबालिग युवती के साथ बैठा देखा और टोका।

पुलिस का दावा है कि इस पर प्रशांत राजपूत ने अपनी बहन आकांक्षा को मौके पर बुला लिया और दोनों ने हंगामा किया। इसी आधार पर पुलिस बल से धक्का-मुक्की का आरोप लगाते हुए दोनों भाई-बहन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरी कहानी पुलिस को संसार करती है यदि ऐसा होता भी तो कोई अपनी सगी बहन को नहीं बुलाता।

हकीकत इससे बिल्कुल उलट

स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष के अनुसार, पुलिस की यह पूरी कहानी झूठी और गढ़ी हुई है।
आरोप है कि सबसे पहले युवती से पुलिस ने अभद्र व्यवहार किया, जब उसने विरोध किया तो मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसके भाई प्रशांत राजपूत को बेरहमी से पीटा।
इसके बाद युवती को भी हिरासत में ले लिया गया और मानसिक दबाव बनाया गया। उसका आईफोन भी छीन लिया उसे उसकी मां के सामने बुरी तरह पीटा और फिर सबको थाना कादरी गेट में भी बंद किया जाकर।जब मामला पुलिस के खिलाफ बनता दिखा, तब अपनी गर्दन बचाने के लिए कांस्टेबल से मनमानी तहरीर लिखवाकर पूरे मामले को पलट दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में महिला थाना अध्यक्ष रक्षा सिंह पर खाकी का दुरुपयोग करने और युवती से दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगे हैं।
मौके पर थाना प्रभारी दरोगा कपिल चौधरी भी अपनी फोर्स के साथ पहुंचे थे। आरोप है कि मौजूद सभी पुलिसकर्मियों ने मिलकर युवती और उसके भाई को डराया-धमकाया।
बचाव में गढ़ा गया फर्जी मुकदमा
जब पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे, तो आनन-फानन में पूरा मामला फैब्रिकेट कर युवती और उसके भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया, ताकि पुलिस की करतूतें उजागर न हो सकें।
घटना के बाद महिला संगठनों में भारी आक्रोश है। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को लेकर महिला आयोग और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात करेंगे।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि महिला थाना अध्यक्ष रक्षा सिंह और उनके पति, जो जिले में ही इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं, अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है किथाना कादरी गेट, और कोतवाली सदर समेत महिला थाने पर “बिना पैसे कोई काम नहीं होता”, जिससे जिले की पुलिस की छवि लगातार धूमिल हो रही है। शहर के विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी जिले में ही नहीं रहे थे और उनकी पुलिस में चलती भी नहीं है बाय किसी के सुख-दुख में भी शामिल नहीं होते जिस कारण कोई सुनने वाला नहीं है।
मिशन शक्ति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि जब महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर चल रही योजनाओं में ही पुलिस उत्पीड़क बन जाए, तो आम नाबालिग युवती किससे न्याय की उम्मीद करे?

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