अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को ईरान ने ट्रंप की धमकी का तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो उसे ऐसा जवाब दिया जाएगा जैसा पहले कभी नहीं दिया गया। इस बयान ने पश्चिम एशिया में पहले से ही अस्थिर हालात को और गंभीर बना दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी थी। उन्होंने ईरान से तुरंत न्यूक्लियर डील करने और बातचीत की मेज पर लौटने का आह्वान किया था। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर दबाव की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका और गहरी हो गई है।
ईरान ने इस धमकी को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करेगा। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने एक सख्त बयान जारी कर कहा कि ईरान आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी और जबरदस्ती की भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी।
ईरानी मिशन के बयान में यह भी कहा गया कि यदि ईरान को मजबूर किया गया, तो वह अपने बचाव के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। बयान में यह चेतावनी खास तौर पर अमेरिका के लिए थी कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब पहले से कहीं ज्यादा कठोर और प्रभावी होगा।
ईरान ने अपने जवाब के साथ ट्रंप के पिछले सप्ताह किए गए सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इस पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका का एक “विशाल बेड़ा” इस्लामिक रिपब्लिक ईरान की ओर बढ़ रहा है। इस बयान को सैन्य दबाव और मनोवैज्ञानिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक धमकियां दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाओं को कमजोर करती हैं। जहां अमेरिका ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्ती दिखा रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ सीधी चुनौती मानता है।
पश्चिम एशिया में पहले से ही इज़राइल, गाजा और अन्य क्षेत्रीय संघर्षों के कारण स्थिति नाजुक बनी हुई है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। कई देशों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अधिकारियों ने संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है ताकि हालात किसी बड़े सैन्य संघर्ष की ओर न बढ़ें।
ईरान की ओर से बार-बार यह संकेत दिया गया है कि वह बातचीत के दरवाजे बंद नहीं कर रहा है, लेकिन सम्मानजनक और समान आधार पर ही संवाद संभव है। वहीं अमेरिका की सख्त बयानबाजी यह दर्शाती है कि वह दबाव बनाकर अपने लक्ष्य हासिल करना चाहता है।


