अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहा राजनयिक और व्यापारिक तनाव अब सीधे तौर पर रक्षा संबंधों को प्रभावित करने लगा है। कनाडा में अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा 88 F-35 लड़ाकू विमानों की खरीद से पीछे हटता है, तो नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) की मौजूदा संरचना में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। इस बयान ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
होकस्ट्रा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कनाडा ने अमेरिका से 19 अरब डॉलर की F-35 स्टील्थ फाइटर जेट डील की औपचारिक समीक्षा करने का फैसला लिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर टैरिफ लगाने की धमकी के बाद उठाया गया, जिसे ओटावा ने व्यापारिक दबाव के रूप में देखा है।
गौरतलब है कि साल 2023 में कनाडा ने अमेरिकी डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन से 88 F-35 लड़ाकू विमान खरीदने का करार किया था। इस सौदे के तहत 16 विमानों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और इनकी डिलीवरी 2026 में तय है। अब इस डील की समीक्षा ने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
NORAD, जिसकी स्थापना 1957 में हुई थी, अमेरिका और कनाडा का एक संयुक्त सैन्य कमांड है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तरी अमेरिका की हवाई और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों और दुश्मन विमानों की निगरानी शामिल है। यह व्यवस्था दोनों देशों को आपसी समन्वय के तहत त्वरित सैन्य कार्रवाई की अनुमति देती है।
अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा ने CBC News से बातचीत में कहा कि अगर कनाडा F-35 जैसी उन्नत क्षमता प्रदान नहीं करता है, तो अमेरिका को उन कमियों को खुद पूरा करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा रणनीति को नए सिरे से डिजाइन करना पड़ सकता है।
इस बीच कनाडा ने संकेत दिए हैं कि वह F-35 के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा स्वीडन की डिफेंस कंपनी Saab के साथ बातचीत कर रहा है, जिसमें 72 ग्रिपेन E लड़ाकू विमान और 6 ग्लोबलआई सर्विलांस एयरक्राफ्ट शामिल हो सकते हैं। इसे कनाडा के ‘प्लान बी’ के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि अमेरिका को यह विकल्प मंजूर नहीं दिखता। होकस्ट्रा ने साफ कहा कि अगर कनाडा ग्रिपेन जैसे विमानों को चुनता है, तो भी NORAD की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार करना होगा। उनका कहना है कि ये विमान F-35 की तुलना में तकनीकी रूप से कमतर हैं और अमेरिकी सिस्टम के साथ पूरी तरह इंटरऑपरेबल नहीं हैं।
होकस्ट्रा ने यह भी कहा कि अगर कनाडा ऐसा प्लेटफॉर्म चुनता है जो F-35 की तरह अमेरिकी सिस्टम के साथ सहज रूप से काम नहीं कर सकता, तो इससे संयुक्त रक्षा क्षमता प्रभावित होगी। ऐसी स्थिति में अमेरिका को यह तय करना पड़ेगा कि वह उस रणनीतिक कमी को कैसे पूरा करे।
इस पूरे विवाद से यह साफ झलकता है कि अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिकी तकनीक पर निर्भर बना रहे, ताकि दोनों देशों की सेनाएं बिना किसी बाधा के साथ मिलकर काम कर सकें। दूसरी ओर, कनाडा व्यापारिक दबावों और टैरिफ की धमकियों के बीच अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और वैकल्पिक साझेदारों पर विचार कर रहा है।


