सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में छात्र विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और विश्वविद्यालयों पर बढ़ते सरकारी दबाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसका संदेश बेहद स्पष्ट था—शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की आज़ादी से कोई समझौता नहीं होगा।
‘ज्ञान ही शक्ति है’ (Knowledge is Power) नाम से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने उन छात्रों और प्रोफेसरों के समर्थन में मार्च किया, जिन्हें विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण नौकरी से निकाले जाने या पद से हटाए जाने का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार विश्वविद्यालयों पर राजनीतिक नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है और असहमति जताने वालों को डराने के लिए दमनकारी कदम उठा रही है। उनका कहना है कि शिक्षा को सत्ता की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात इसके ठीक उलट हैं।
इस छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी, जब उत्तरी सर्बिया के शहर नोवी सैड में एक रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया और सरकार की जवाबदेही, भ्रष्टाचार और लापरवाही को लेकर सवाल खड़े हो गए।
हादसे के बाद छात्रों ने पारदर्शी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध शुरू किया। धीरे-धीरे यह आंदोलन सिर्फ हादसे तक सीमित न रहकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संस्थागत स्वायत्तता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक बन गया।
छात्रों का आरोप है कि सरकार ने उनके आंदोलनों को दबाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव डाला। कई शिक्षकों को निलंबित किया गया या उनके अनुबंध रद्द कर दिए गए, जबकि छात्रों को निष्कासन और कानूनी कार्रवाई की धमकियां दी गईं।
बेलग्रेड में हुए ताजा प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां और बैनर उठाए हुए थे, जिन पर “डर से नहीं, ज्ञान से देश बनेगा” और “विश्वविद्यालय सत्ता के नहीं, समाज के हैं” जैसे नारे लिखे थे। माहौल शांत लेकिन दृढ़ संकल्प से भरा हुआ था।
सरकार की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है और किसी को भी राजनीतिक कारणों से निशाना नहीं बनाया जा रहा। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और शिक्षाविदों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि सर्बिया में छात्र आंदोलन ऐतिहासिक रूप से बड़े राजनीतिक बदलावों की भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में मौजूदा प्रदर्शन भी आने वाले समय में सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब इसमें शिक्षकों और आम जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।


