देहरादून: उत्तराखंड एससी एसटी एम्पलाइज फेडरेशन (SC ST Employees Federation) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह बुटोइया (Dr. Jitendra Singh Butoia) ने कहा है कि समानता स्थापित करने के लिए सामाजिक न्याय अनिवार्य है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के चेयरमैन को ई-मेल के माध्यम से यूसीसी बिल–2026 के समर्थन में ज्ञापन प्रेषित किया।
डॉ. बुटोइया ने अपने संदेश में कहा कि जब तक क्षेत्र, भाषा, जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव बना रहेगा, तब तक समाज में वास्तविक एकता संभव नहीं है। यदि एकजुटता की बात की जाती है, तो व्यवहार में सभी के साथ समानता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के सभी क्षेत्रों और संस्थानों में जब समान व्यवहार होगा, तभी न्याय और कल्याण संभव है।
फेडरेशन ने मांग की कि समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लागू करते हुए उत्तराखंड में जिन कार्मिकों का नियमितीकरण किया जा रहा है, उसी अनुपात में आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को भी अवसर दिए जाएं। डॉ. बुटोइया ने कहा कि आरक्षित श्रेणी के लिए जितने पद निर्धारित हैं, उतने ही पदों पर समानांतर नियुक्तियां की जानी चाहिए—तभी वास्तविक न्याय संभव होगा।
बैकलॉग पदों पर विज्ञप्ति की मांग
इस संबंध में फेडरेशन की ओर से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं सचिव, सैनिक कल्याण (उत्तराखंड शासन) को भी ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि जो पद अवशेष/बैकलॉग में रह जाते हैं, उन पर नियमितीकरण के साथ-साथ बैकलॉग की अलग से विज्ञप्ति जारी की जाए। फेडरेशन का कहना है कि सामाजिक न्याय के माध्यम से ही समानता स्थापित हो सकती है और इसी से देश के प्रत्येक नागरिक का समग्र कल्याण सुनिश्चित होगा।


