फ़र्ज़ी दिव्यांग सर्टिफिकेट से नौकरी करने का किया पर्दाफाश
अयोध्या / लखनऊ।
अयोध्या में तैनात GST विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे का मामला विवाद गहराता जा रहा है। उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के जो आरोप सामने आए हैं, उन्होंने अब नया मोड़ ले लिया है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आरोपों को बल उनके सगे भाई विश्वजीत सिंह के बयानों से मिल रहा है, जो हाल ही में सोशल मीडिया के सामने आकर कथित तौर पर कई राज उजागर कर चुके हैं।
विश्वजीत सिंह ने सामने आकर दावा किया कि उनके भाई प्रशांत कुमार सिंह से जुड़े कई तथ्य सार्वजनिक बहस से दूर रखे गए हैं। उनके अनुसार,दिव्यांग प्रमाणपत्र को लेकर परिवार के भीतर पहले से सवाल उठते रहे,नौकरी से जुड़े दस्तावेजों और दावों में गंभीर विरोधाभास हैं,
और अब जब मामला उजागर होने लगा, तो इस्तीफे को एक अलग नैरेटिव देने की कोशिश की गई।
हालांकि, विश्वजीत सिंह के इन दावों की स्वतंत्र जांच अभी शेष है, लेकिन परिवार के भीतर से आए आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, जब फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र को लेकर शिकायतें और संभावित जांच की चर्चा तेज हुई, तो प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में शंकराचार्य के बयानों से आहत होने से जोड़कर पेश किया गया।
जानकारों का कहना है कि यह असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की रणनीति हो सकती है, क्योंकि मूल सवाल अभी भी वही है— दिव्यांग प्रमाणपत्र वैध था या नहीं?
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमसम्मत था, तो
जांच की चर्चा शुरू होते ही इस्तीफे की जल्दी क्यों दिखाई गई?
दिव्यांग प्रमाणपत्र की सत्यता सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
इन्हीं सवालों के चलते इस्तीफे को लेकर इसे “ड्रामा” या “मैनेज्ड प्रोपेगेंडा” बताया जा रहा है।
यह मामला अब सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है। यदि आरोप सही पाए गए, तो
दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने वाले मेडिकल बोर्ड,संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी,और सत्यापन करने वाली प्रशासनिक इकाइयाँ भी जांच के घेरे में आ सकती हैं।विभागीय व आपराधिक कार्रवाई, और पूरे मामले की विजिलेंस/CBI स्तर की जांच तक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, सगे भाई द्वारा सोशल मीडिया पर सामने आकर किए गए कथित खुलासों ने मामले को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है।

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