अमेरिका (America) में इन दिनों प्रकृति ने कहर बरपा रखा है। देश के पूर्वोत्तर हिस्सों में आइसक्वेक यानी हिम भूकंप और भीषण बर्फीले तूफान ने भारी तबाही मचा दी है। सोमवार को आए इस तूफान के चलते कम से कम 30 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि लाखों लोग भीषण ठंड में बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, तूफान के आखिरी चरण में कई इलाकों में दोबारा भारी बर्फबारी हुई, वहीं दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में जमा देने वाली बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए। सड़कों पर फिसलन, पेड़ों के गिरने और बिजली के खंभों के क्षतिग्रस्त होने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
अर्कांसस से लेकर न्यू इंग्लैंड तक करीब 2,100 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में एक फुट से ज्यादा बर्फ जम गई है। इसके कारण सोमवार को सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा, हाईवे बंद करने पड़े और कई राज्यों में स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया। आम लोगों के लिए घर से बाहर निकलना बेहद खतरनाक हो गया है।
राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने बताया कि पिट्सबर्ग के उत्तरी इलाकों में करीब 20 इंच तक बर्फबारी दर्ज की गई। इस दौरान तापमान शून्य से 31 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला गया, जिससे ठंड जानलेवा साबित हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इस तूफान से जुड़ी घटनाओं में अब तक कम से कम 25 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
बर्फीले तूफान का सबसे बड़ा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। पावरआउटेज डॉट कॉम के अनुसार, सोमवार दोपहर तक पूरे अमेरिका में 7 लाख 50 हजार से ज्यादा घरों और प्रतिष्ठानों में बिजली गुल रही। कई इलाकों में लोग हीटर और अन्य जरूरी सुविधाओं के बिना ठंड में कांपते नजर आए।
इस बीच मिसिसिपी राज्य के कुछ हिस्से 1994 के बाद के सबसे भीषण बर्फीले तूफान का सामना कर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि मिसिसिपी विश्वविद्यालय को अपने ऑक्सफोर्ड परिसर में पूरे सप्ताह के लिए कक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं, क्योंकि पूरा कैंपस बर्फ की मोटी परत से ढका हुआ है।
हवाई सेवाएं भी इस प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटअवेयर डॉट कॉम’ के मुताबिक, सोमवार को अमेरिका में 8,000 से अधिक उड़ानों में देरी हुई या उन्हें रद्द करना पड़ा। हवाई अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
विमानन विश्लेषण कंपनी सिरीअम ने बताया कि रविवार को अमेरिका की करीब 45 प्रतिशत उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। यह स्थिति कोरोना वायरस महामारी के बाद पहली बार देखने को मिली है, जब इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें एक साथ रद्द हुई हों।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक तापमान में तेज गिरावट के कारण आइसक्वेक यानी हिम भूकंप की घटनाएं भी बढ़ी हैं। इनसे तेज धमाकों जैसी आवाजें सुनाई देती हैं और जमीन में दरारें पड़ जाती हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।


