फर्रुखाबाद: मेला रामनागरिया (Mela Ramnagariya) में जिला आर्य प्रतिनिधि सभा Farrukhabad द्वारा आयोजित वैदि तयक क्षेत्र चरित्र निर्माण शिविर के अंतर्गत एक प्रेरणास्पद वैदिक बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने वृद्ध जनों की सेवा को यज्ञ के समान पवित्र कर्तव्य बताते हुए आधुनिक समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया।
शिविर के संचालक आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने वैदिक सिद्धान्तों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” ये केवल शास्त्रीय वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। वेदों के अनुसार वृद्धजनों की सेवा, सम्मान और संरक्षण सामाजिक-यज्ञ का अभिन्न अंग है, जिससे परिवार, राष्ट्र और मानवता पुष्ट होती है।
उन्होंने गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक भौतिकतावादी शिक्षा और स्वार्थप्रधान जीवन-शैली के कारण आज समाज में बुज़ुर्गों की स्थिति दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। संयुक्त परिवारों के विघटन और नैतिक शिक्षा के अभाव ने अनेक वृद्धों को अकेलेपन, उपेक्षा और असुरक्षा के गर्त में धकेल दिया है।वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या सामाजिक पतन का स्पष्ट संकेत है।
आर्य समाज के वक्ता संदीप आर्य ने आह्वान किया कि प्रत्येक परिवार अपने घर को ही प्रथम गुरुकुल बनाए, जहाँ वृद्धों का सम्मान, सेवा और स्नेह जीवन का स्वाभाविक संस्कार बने। यही सच्चा यज्ञ, यही सच्ची राष्ट्रसेवा है। प्रदीप शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज राष्ट्र व परिवार निर्माण की संस्कार शाला है इससे जुड़कर ही हम अपनी संतति का निर्माण कर सकते हैं। मैनपुरी से आये आर्य भजनोपदेशक राजेश आर्य, जितेंद्र आर्य ने भजन के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम में शिविरार्थियों, आर्य समाज के पदाधिकारियों एवं मुकेश सिंह,आचार्य सतेंद्र आर्य,अनिल आर्य,हरिओम शास्त्री,मंगलम आर्य ,उत्कर्ष आर्य आदि श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


