अयोध्या: शंकराचार्य (Shankaracharya) से जुड़े बयानबाज़ी के मामले में प्रदेश की नौकरशाही से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अयोध्या में तैनात प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफ़ा (resigns) दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को भेजा है। इस्तीफ़े में उन्होंने स्पष्ट तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन और शंकराचार्य के विरोध का संकेत दिया है। प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पत्र में लिखा है—
“मैं सरकार का वेतनभोगी हूँ। मेरे मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ कोई अनर्गल प्रलाप करे और मैं रोबोट की तरह वेतन लेता रहूं—यह संभव नहीं है।” इस इस्तीफ़े को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इसे शंकराचार्य प्रकरण के बाद नौकरशाही के भीतर उभरे वैचारिक विभाजन के रूप में देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत नैतिक निर्णय बता रहे हैं, तो कुछ इसे नौकरशाही के राजनीतिकरण का संकेत मान रहे हैं।
इस घटनाक्रम के बाद यह टिप्पणी भी सामने आ रही है कि राजनीतिक नारों और वैचारिक टकराव का असर अब प्रशासनिक ढांचे में भी दिखाई देने लगा है। नौकरशाही के भीतर मतभेद खुलकर सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जनकवि धूमिल की पंक्तियों का उल्लेख भी चर्चा में है, जिनमें सत्ता, डर और व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष मिलता है। यह संदर्भ मौजूदा राजनीतिक माहौल को और गहराई देता नजर आ रहा है।


