फर्रुखाबाद। सातनपुर मंडी की आलू आढ़ती एसोसिएशन इन दिनों संगठनात्मक अव्यवस्था और आपसी खींचतान का प्रतीक बन गई है। हालत यह है कि एक ही संगठन में दो-दो अध्यक्षों की घोषणा कर दी गई,जबकि एक अध्यक्ष पूर्व से ही अपनी चला रहा।जिससे न सिर्फ व्यापारियों में भ्रम फैला, बल्कि वर्षों से चली आ रही संगठन की साख भी सवालों के घेरे में आ गई।
पहले शैलेंद्र यादव को अध्यक्ष घोषित किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि घोषणा के ठीक अगले दिन ही मुकेश राजपूत के पुत्र अंकित राजपूत की भी अध्यक्ष पद पर ताजपोशी कर दी गई। यानी संगठन में अध्यक्ष एक नहीं, दो-दो हो गए।
मामला यहीं नहीं थमा। पहले से पद पर काबिज स्वर्गीय सतीश वर्मा नेताजी के पुत्र रिंकू वर्मा भी अपने अध्यक्ष पद पर डटे हुए हैं। नतीजा यह कि सातनपुर मंडी का यह संगठन अब नेतृत्व की भीड़ में फंसकर पूरी तरह दिशाहीन नजर आ रहा है।
संरक्षकों की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि हाल ही में घोषित शैलेंद्र यादव और अंकित राजपूत—दोनों की कमेटियों के संरक्षक एक ही हैं। इनमें संगठन के पूर्व अध्यक्ष शीतले स्वामी और अजय गंगवार उर्फ सन्नू बाबू जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल बताए जा रहे हैं। यही नहीं, इन्हीं संरक्षकों के विज्ञापन खुलेआम छप रहे हैं, जिससे यह सवाल और गहराता जा रहा है कि आखिर संगठन को एकजुट करने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है और कौन उसे और उलझा रहा है।
आलू व्यापार से जुड़े आढ़तियों का कहना है कि इस तरह की आपसी राजनीति और पद की होड़ ने संगठन की गरिमा को पूरी तरह गिरा दिया है। जो संगठन व्यापारियों की आवाज बनने के लिए बना था, वही अब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का अखाड़ा बनता जा रहा है।
कुल मिलाकर सातनपुर मंडी की आलू आढ़ती एसोसिएशन आज मखौल बन चुकी है। पदाधिकारियों की आपसी खींचतान ने न केवल संगठन की प्रतिष्ठा गिराई है, बल्कि खुद उनकी व्यक्तिगत साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई, तो यह संगठन व्यापारियों के हितों की बजाय अव्यवस्था की मिसाल बनकर रह जाएगा।

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