– एक फरवरी को भारत बंद का ऐलान, भाजपा के खिलाफ नारेबाज़ी
– नेताओं को भेजी गई चूड़ियाँ
फर्रुखाबाद। यूजीसी के विरोध को लेकर माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। मंगलवार को इस विरोध ने उग्र रूप ले लिया, जब करणी सेवा महेंद्र संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर नारेबाज़ी की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ तीखे नारे लगाए और एक फरवरी को भारत बंद का ऐलान किया।
प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सरकार पर युवाओं, छात्रों और शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यूजीसी से जुड़े हालिया निर्णय शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाले हैं और इससे आम छात्र तथा शिक्षक सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन
मंगलवार को करणी सेवा महेंद्र संगठनों के नेतृत्व में कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर यूजीसी के विरोध में नारे लिखे हुए थे। माहौल उस समय और ज्यादा गरमा गया जब प्रदर्शनकारियों ने भाजपा नेताओं को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियाँ भेजने की घोषणा की और इसे सरकार की “कमज़ोर नीतियों” का प्रतीक बताया।
प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने नगर मजिस्ट्रेट संजय बंसल को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी से जुड़े फैसलों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि एक फरवरी को भारत बंद के दौरान सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सभी छात्र संगठनों, शिक्षकों और आम जनता से बंद को समर्थन देने की अपील की। संगठन के नेताओं का कहना था कि यह लड़ाई केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है।
प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारों और चेतावनियों से साफ था कि आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है।

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