– रामलला के दर्शन-पूजन के बाद अविमुक्तेश्वरानंद के अनशन पर दी प्रतिक्रिया
अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष और प्रखर हिंदुत्व नेता प्रवीण तोगड़िया सोमवार को धार्मिक नगरी अयोध्या पहुंचे। अयोध्या आगमन पर उन्होंने सबसे पहले रामलला के दर्शन-पूजन किए और मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देश और समाज की शांति के लिए प्रार्थना की।
राम मंदिर में दर्शन के बाद प्रवीण तोगड़िया ने संतों और समाज से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। विशेष रूप से उन्होंने हाल में चर्चा में रहे अविमुक्तेश्वरानंद के अनशन प्रकरण पर प्रतिक्रिया दी।
“जो हुआ, नहीं होना चाहिए था”
मीडिया से बातचीत में प्रवीण तोगड़िया ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“जो कुछ भी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था।
इस तरह के मामलों में टकराव के बजाय संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि संत समाज का देश में विशेष स्थान है और उनसे जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और संयम आवश्यक है। ऐसी परिस्थितियाँ किसी भी रूप में समाज को बाँटने वाली नहीं होनी चाहिए।
संवाद और संयम पर जोर
प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक पक्षों के बीच संवाद की कमी के कारण हालात बिगड़ते हैं। यदि समय रहते बातचीत हो जाए, तो अनशन या टकराव जैसी स्थिति पैदा ही न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और समाज—दोनों की जिम्मेदारी है कि संतों के सम्मान और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूजीसी नियमों और धार्मिक विषयों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में बहस चल रही है। अयोध्या जैसी संवेदनशील और आस्था की नगरी से दिया गया यह संदेश शांतिपूर्ण समाधान और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
प्रवीण तोगड़िया के दौरे और बयान के बाद अयोध्या सहित प्रदेश के धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई लोग इसे संत समाज और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की अपील के रूप में देख रहे हैं।





