नई दिल्ली: देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स (Taxpayers) की निगाहें 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले इस बजट में मध्यम वर्ग को राहत देने के संकेत मिल रहे हैं। इसी कड़ी में पति-पत्नी के लिए संयुक्त इनकम टैक्स रिटर्न (जॉइंट आईटीआर) की व्यवस्था पर भी विचार की चर्चा तेज हो गई है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि विवाहित दंपतियों को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की सुविधा दी जानी चाहिए। आईसीएआई का मानना है कि इससे टैक्स प्रणाली सरल होगी और परिवारों पर टैक्स का बोझ कम होगा। वर्तमान में पति और पत्नी को अलग-अलग इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करनी होती है, चाहे दोनों की आय सीमित हो या परिवार का खर्च संयुक्त रूप से चल रहा हो।
होम लोन, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, बच्चों की शिक्षा जैसे खर्च भी अलग-अलग दिखाने पड़ते हैं।
यदि बजट 2026 में यह प्रस्ताव लागू होता है, तो टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया सरल होगी,
पारिवारिक आय का एकीकृत आकलन संभव होगा,
मध्यम वर्गीय दंपतियों को टैक्स में राहत मिल सकती है।
टैक्स अनुपालन (कम्प्लीयंस) आसान होगा।
देश में लगभग 8 करोड़ से अधिक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल होती हैं
इनमें करीब 55–60 प्रतिशत टैक्सपेयर्स मध्यम वर्ग से आते हैं
शहरी क्षेत्रों में 35–40 प्रतिशत परिवारों में पति-पत्नी दोनों आय अर्जित करते हैं।
फिलहाल यह सुझाव विचाराधीन है और इस पर अंतिम फैसला बजट भाषण के दौरान ही सामने आएगा। यदि सरकार इसे स्वीकार करती है, तो यह विवाहित टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा नीतिगत बदलाव माना जाएगा।अब देखना यह होगा कि बजट 2026 में सरकार इस सुझाव को मानती है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि मध्यम वर्ग और टैक्सपेयर्स को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं।


