यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। मिनी कुंभ मेला राम नगरिया के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन देर रात तक काव्य, विचार और राष्ट्रबोध का उत्सव बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए जाने-माने कवियों और साहित्यकारों ने वीर, श्रृंगार, हास्य, भक्ति और ओज रस की रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। भारी संख्या में उपस्थित साहित्यप्रेमी देर रात तक कविताओं का रसास्वादन करते रहे।
मंच संचालक एवं साहित्यकार डा. शिव ओम् अंबर के संयोजन व संचालन में हुए इस कवि सम्मेलन ने साहित्यिक गरिमा और वैचारिक दृढ़ता—दोनों का संतुलन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों ने उपस्थिति दर्ज कर कवियों एवं साहित्यकारों को सम्मानित किया।
वरिष्ठ कवि प्रताप फौजदार ने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों से श्रोताओं को झकझोर दिया जमीं वो अन्न पैदा कर वफा जो खून में बोले, भगत सिंह जैसे बेटों को वतन अब भी तरसता है। उनकी कविता ने राष्ट्रप्रेम और बलिदान की स्मृति को मंच पर जीवंत कर दिया।
देश की जानी-मानी कवयित्री डा. कीर्ति काले ने भक्ति और संस्कार से ओतप्रोत पंक्तियाँ पढ़ीं अयोध्या में अगर ढूंढोगे तो श्रीराम मिलते हैं, वृंदावन में ढूंढोगे तो फिर घनश्याम मिलते हैं, काशी में ढूंढोगे तो भोलेनाथ मिल जाएं, मगर मां-बाप के चरणों में चारों धाम मिलते हैं। कविता ने सभागार को तालियों से गुंजायमान कर दिया।
बाराबंकी से आए युवा गीतकार प्रियांशु गजेन्द्र ने जीवन के उतार-चढ़ाव को सहज शब्दों में पिरोते हुए गीत प्रस्तुत किया फूलों के दिन, शूलों के दिन, गुड़हल और बबूलों के दिन सबके आते हैं, दिन से क्या घबराना, दिन तो आते-जाते हैं।
बिहार से आए प्रसिद्ध हास्य कवि शंभू शिखर ने अपने चुटीले अंदाज़ में कहा पोशाक पुरानी लिए अभिनव हूँ मनाओ, नफऱत में भी मैं प्यार का कलरव हूँ मनाओ, रोने के लिए और भी महफि़ल है जहाँ में उनकी प्रस्तुति ने ठहाकों के साथ-साथ गहरी सामाजिक टिप्पणी भी की।
कवि अभय निर्भीक ने राष्ट्रध्वज और मातृभूमि के सम्मान का संकल्प दोहराते हुए कहा भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे, अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे। अध्यक्षीय उद्बोधन में चेतना का आह्वान अध्यक्ष कवि बृज किशोर सिंह ‘किशोर’ ने कहा उनींदा गाँव का जब हर गली-कूंचा, रतजगा करना हमारा फज़ऱ् है यारों। उनकी पंक्तियों ने सामाजिक जागरण का संदेश दिया।
सम्मेलन के संयोजक डा. शिव ओम् अंबर ने अपनी रचना में आत्मसम्मान और संघर्ष का संदेश दिया लफ्ज़ों में टंकार बिठा, लहजे में खुद्दारी रख। जीने की ख्वाहिश है तो, मरने की तैयारी रख। श्रीमद् भगवद् गीता पढ़, युद्ध निरंतर जारी रख। उनकी पंक्तियाँ सम्मेलन की वैचारिक धुरी बनकर उभरीं।
वैभव सोमवंशी ‘सुभग’ और उत्कर्ष अग्निहोत्री ने भी अपनी रचनाओं से मंच को ऊँचाई दी और श्रोताओं की भरपूर सराहना पाई।
इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती भारती मिश्रा के नवीन उपन्यास ‘लौ’ का विधिवत विमोचन अधिकारियों और साहित्यकारों द्वारा किया गया। साहित्यिक जगत में इसे समकालीन लेखन की महत्वपूर्ण कृति बताया गया।
कार्यक्रम में एडीएम, एसडीएम, सहित भूपेन्द्र प्रताप सिंह, महेश पाल सिंह, उपकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर मेला राम नगरिया का यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन काव्य, राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक चेतना का यादगार संगम बनकर देर रात तक चर्चा में रहा।






