राम के बाद अब कृष्ण के प्रतीक पर राजनीति तेज
मथुरा। वृंदावन में आयोजित ‘मन की बात’ कार्यक्रम रविवार को संपन्न हुआ। जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश के मुखिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी बड़े स्तर पर देखी गई मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का यहां पहली बार आना प्रदेश अध्यक्ष समेत यूपी सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ के संग मन की बात साझा करना महज एक सरकारी या सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसे भाजपा के धारदार राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि यह मंच आगामी विधानसभा चुनाव की वैचारिक शुरुआत है।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का रविवार को यह पहला उत्तर प्रदेश दौरा रहा। पार्टी ने इसके लिए कृष्ण नगरी वृंदावन को चुना, जो राजनीतिक दृष्टि से सामान्य नहीं बल्कि प्रतीकात्मक रूप से बेहद सशक्त निर्णय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा किया गया जोरदार स्वागत यह संकेत देता है कि संगठन और सत्ता, दोनों एक सुर में चुनावी रण की तैयारी में उतर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अयोध्या और भगवान राम के बाद अब भाजपा ने भगवान कृष्ण को अपने मुख्य राजनीतिक विमर्श में शामिल करने का संकेत दिया है।
यह इसलिए भी अहम है क्योंकि समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव सार्वजनिक मंचों से स्वयं को भगवान कृष्ण का वंशज बताकर सामाजिक न्याय और यादव राजनीति को जोड़ते रहे हैं।अब भाजपा ने उसी कृष्ण की धरती से विधानसभा चुनाव से पहले सीधा वैचारिक सवाल खड़ा कर दिया है—
कृष्ण केवल वंश का विषय हैं या कर्म, नीति और राष्ट्रधर्म का प्रतीक?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात को सामूहिक रूप से सुनना, भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आस्था, राष्ट्रवाद और संगठन को एक साथ साधा जाता है।
लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि ‘मन की बात’ की आड़ में असल मंथन विधानसभा चुनाव को लेकर हुआ।
सपा के नैरेटिव को सीधी चुनौती
जहां समाजवादी पार्टी कृष्ण को वंश और जातीय पहचान से जोड़कर देखती है, वहीं भाजपा का संदेश साफ माना जा रहा है कृष्ण रणनीति, धर्मयुद्ध और राष्ट्रहित के प्रतीक हैं। यानी यह लड़ाई अब सिर्फ योजनाओं या सत्ता की नहीं, बल्कि प्रतीकों और विचारधारा की भी है।
वृंदावन जैसे धार्मिक केंद्र से यह संदेश देना कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व की सीधी निगरानी में चुनाव लड़ेगी, विपक्ष के लिए स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है।कार्यकर्ताओं में उत्साह और संगठन में अनुशासन का संदेश देते हुए भाजपा ने यह भी जता दिया है कि यूपी चुनाव हल्के में लेने वाला नहीं है।
राम के बाद अब कृष्ण भाजपा के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आते दिख रहे हैं,समाजवादी पार्टी के कृष्ण-वंशज दावे को भाजपा ने उसी धरती से चुनौती दी है,और विधानसभा चुनाव से पहले वैचारिक युद्ध की शुरुआत वृंदावन से कर दी गई है।यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति की नई पटकथा का पहला अध्याय माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here