लखनऊ। स्मार्ट पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब ‘यक्ष एप’ को केवल थाना प्रभारियों तक सीमित न रखते हुए बीट सिपाहियों को भी इसे ऑपरेट करने का अधिकार दिया गया है। इससे जमीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण, निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया और तेज होगी।
अब तक ‘यक्ष एप’ का संचालन केवल थाना प्रभारी (एसएचओ) के स्तर तक सीमित था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत बीट सिपाहियों को भी एप का एक्सेस दिया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इससे सूचनाएं सीधे फील्ड से सिस्टम में दर्ज होंगी और कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
बीट सिपाहियों को एप से जोड़ने के बाद ‘यक्ष एप’ की उपयोगिता कई गुना बढ़ जाएगी। बीट स्तर पर अपराधियों, संदिग्धों और नए निवासियों की जानकारी तुरंत अपडेट की जा सकेगी, जिससे थाने और उच्च अधिकारियों को रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा।
‘यक्ष एप’ में पहले से ही त्रिनेत्र, पहचान और बीट प्रहरी जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से—
संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान
कैमरा नेटवर्क से निगरानी
बीटवार गतिविधियों की रिपोर्टिंग
को एक ही प्लेटफॉर्म पर किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत हर बीट का सिपाही अपने क्षेत्र के अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और संदिग्ध व्यक्तियों का पूरा डाटा एप में फीड करेगा। इससे अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और किसी भी संदिग्ध हलचल पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
अब बीट सिपाही अपने क्षेत्र में नए किरायेदारों, बाहरी व्यक्तियों और नए पते का डिजिटल सत्यापन कर सकेगा। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी भी रखी जाएगी, जिससे अपराध की संभावनाओं को पहले ही रोका जा सके।
महानिदेशक पुलिस ने इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिलों, जोन और रेंज के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि बीट सिपाहियों को प्रशिक्षण देकर जल्द से जल्द ‘यक्ष एप’ से जोड़ा जाए।
पुलिस विभाग का मानना है कि बीट सिपाही पुलिसिंग की सबसे मजबूत कड़ी होते हैं। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने से न केवल सूचना तंत्र मजबूत होगा, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और विश्वास भी बढ़ेगा।






