फर्रुखाबाद: जनपद में आलू किसानों (potato farmers) की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर गंभीर विचार–विमर्श किया गया। बैठक में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि मौजूदा समय में आलू उत्पादक किसान अभूतपूर्व संकट (unprecedented crisis) से गुजर रहे हैं। इसी क्रम में अशोक कटियार के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही सातनपुर मंडी में आलू के मसले पर एक व्यापक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसानों, व्यापारियों और किसान हितैषी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्यक्रम में आगे के संघर्ष और आंदोलन की रणनीति भी तय की जाएगी।
बैठक में वक्ताओं ने चिंता जताई कि आलू किसानों की समस्याओं पर पक्ष और विपक्ष दोनों ही मौन साधे हुए हैं, मानो यह कोई समस्या ही न हो। जब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी छाई हो, तब ऐसी स्थिति में अन्नदाता किसान को अपने हक और अस्तित्व की रक्षा के लिए स्वयं आगे आना ही पड़ेगा—यह भावना सर्वसम्मति से उभरकर सामने आई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा खेती से दुगनी आय के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। आलू किसान को आज लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा। बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी, भंडारण और परिवहन—हर स्तर पर लागत बढ़ चुकी है, जबकि बाजार में आलू के दाम औंधे मुंह गिरे हुए हैं। परिणामस्वरूप किसान आर्थिक रूप से तबाह और मानसिक रूप से टूट चुका है।
बैठक में यह भी जोर देकर कहा गया कि आलू जैसी प्रमुख नकदी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाना अब टालने योग्य मुद्दा नहीं है। जब गेहूं, धान जैसी फसलों के लिए MSP की व्यवस्था है, तो लाखों किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ी आलू फसल इससे बाहर क्यों रहे?
स्पष्ट शब्दों में कहा गया— “अन्न के भंडार हम भरेंगे, लेकिन अपनी फसल की पूरी कीमत लेकर ही।” आगामी सातनपुर मंडी कार्यक्रम को लेकर किसानों में उम्मीद है कि यह मंच उनकी आवाज़ को मजबूती देगा और प्रशासन व सरकार तक उनकी वास्तविक पीड़ा पहुंचेगी। यदि इसके बाद भी अनदेखी हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप देने पर भी विचार किया जाएगा। अंत में किसानों से एकजुट होने और संगठित संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया गया।


