लखनऊ: प्रदेश में सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act) (संपत्ति प्रतिभूतिकरण और वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रवर्तन अधिनियम) के तहत बैंकों द्वारा की जा रही वसूली में बीते छह महीनों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 में जहां सरफेसी खातों की कुल बकाया राशि (total outstanding amount) 1,706 करोड़ रुपये थी, वहीं सितंबर 2025 तक यह बढ़कर 3,107 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इस तरह वसूली की राशि में लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे राजस्व विभाग और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय व प्रभावी वसूली अभियान का परिणाम माना जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2025 में प्रदेश में कुल 4,833 सरफेसी खाते दर्ज थे, जिन पर 1,706 करोड़ रुपये की बकाया राशि थी। छह माह के भीतर इन खातों की संख्या बढ़कर 5,190 हो गई और कुल बकाया राशि 3,107 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इससे साफ है कि न केवल डिफॉल्ट खातों की पहचान बढ़ी है, बल्कि लंबित मामलों को सरफेसी एक्ट के दायरे में लाकर वसूली की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है।
इस उछाल में पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े बैंकों की अहम भूमिका रही है। इन बैंकों ने अधिक संख्या में डिफॉल्ट खातों को सरफेसी एक्ट के तहत चिन्हित किया और संपत्ति जब्ती व नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके साथ ही जिला स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, संपत्ति पर भौतिक कब्जा दिलाने की कार्रवाई में तेजी और राजस्व विभाग के पोर्टल पर आंकड़ों को अद्यतन करने से वसूली अभियान को मजबूती मिली।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि प्रदेश में अभी करीब 10.34 लाख रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) के मामले लंबित हैं, जिनकी कुल राशि 20,412 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा सरफेसी एक्ट के तहत विभिन्न बैंकों के लगभग 4,351 आवेदन जिला मजिस्ट्रेट स्तर पर संपत्ति पर कब्जा दिलाने की अनुमति के लिए लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इन मामलों के निस्तारण में देरी से वसूली प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
राजस्व विभाग ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि जिन खातों में वसूली पूरी हो चुकी है, उनकी जानकारी तुरंत पोर्टल पर अपडेट की जाए, ताकि वास्तविक और सही आंकड़े सामने आ सकें। साथ ही जिला मजिस्ट्रेट स्तर पर सरफेसी मामलों में भौतिक कब्जा दिलाने की प्रक्रिया को और तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि सरफेसी एक्ट बैंकों और वित्तीय संस्थानों को यह अधिकार देता है कि वे ऋण डिफॉल्टरों की गिरवी रखी संपत्तियों को बिना अदालत की अनुमति के जब्त कर नीलामी के जरिए बकाया वसूल सकें। इसका उद्देश्य बैंकों के एनपीए को कम करना और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाना है।


