लखनऊ: प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं (Road accidents) और उनसे होने वाली मौतों में लगातार इजाफा हो रहा है। खासतौर पर लखनऊ (Lucknow) सहित प्रदेश के 20 चिन्हित जिलों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के शून्य मृत्यु जिला (जेडएफडी) कार्यक्रम और राज्य सरकार की विभिन्न पहलों के बावजूद 2023 और 2024 में सड़क हादसों में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में भी दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों और वाहन चालकों की गंभीरता की कमी इस भयावह स्थिति का मुख्य कारण है। यदि प्रशासन और आम लोग दोनों ही नियमों के पालन को लेकर सख्ती और जिम्मेदारी दिखाएं, तो हादसों में कमी लाई जा सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्रालय ने इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आईआरएडी) के आंकड़ों के आधार पर देश के 100 जिलों को एक्सीडेंटल डेथ रिडक्शन डिस्ट्रिक्ट के रूप में चिन्हित किया है। इनमें उत्तर प्रदेश के 20 जिले शामिल हैं, जिनमें लखनऊ, कानपुर नगर, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, प्रयागराज, बुलंदशहर, उन्नाव, हरदोई, अलीगढ़, मथुरा, बरेली, फतेहपुर, सीतापुर, गोरखपुर, बाराबंकी, कुशीनगर, जौनपुर, बदायूं, फिरोजाबाद और आजमगढ़ शामिल हैं। इन जिलों के 283 ऐसे थानों की पहचान की गई है, जहां करीब 80 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती रही हैं। इन जिलों में अभियान चलाकर दुर्घटनाओं को खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है, हालांकि इसे हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में प्रदेश में 44,534 सड़क दुर्घटनाओं में 23,652 लोगों की मौत हुई थी। इनमें केवल 20 जिलों में ही 19,676 हादसे और 9,683 मौतें दर्ज की गई थीं। इसी तरह वर्ष 2024 में प्रदेशभर में 46,052 सड़क हादसों में 24,118 लोगों की जान गई, जिनमें टॉप 20 जिलों में 20,700 दुर्घटनाएं और 10,092 मौतें हुईं।
लगातार सख्त निर्देश और चिन्हित जिलों पर विशेष निगरानी के बावजूद हादसों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। 2025 को लेकर भी तस्वीर चिंताजनक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024 में जनवरी से नवंबर के बीच जहां 41,483 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं 2025 की इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 46,223 तक पहुंच चुकी है। हालांकि पूरे वर्ष के अधिकृत आंकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं, लेकिन रुझान साफ तौर पर बढ़ोतरी की ओर इशारा कर रहे हैं। पूर्व अपर परिवहन आयुक्त (सड़क सुरक्षा) पुष्पसेन सत्यार्थी का कहना है कि सड़क हादसों पर नियंत्रण लोगों और प्रशासन दोनों की इच्छाशक्ति से ही संभव है।
राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। लखनऊ में वर्ष 2023 में 1,460, 2024 में 1,630 और 2025 में 1,800 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होने का अनुमान है। परिवहन विभाग के जनवरी से सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में पिछले वर्ष की तुलना में करीब सात प्रतिशत हादसों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं उन्नाव में 19.7 प्रतिशत, रायबरेली में 58.9 प्रतिशत, सीतापुर में 9.2 प्रतिशत, लखीमपुर खीरी में 6.8 प्रतिशत और हरदोई में 21.8 प्रतिशत तक हादसे बढ़े हैं। लखनऊ मंडल में कुल मिलाकर दुर्घटनाओं में 16.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने प्रदेश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नियमों के पालन, प्रवर्तन की सख्ती, सड़क इंजीनियरिंग में सुधार और जनजागरूकता पर एक साथ काम नहीं किया जाएगा, तब तक सड़कों पर मौतों का यह सिलसिला थमना मुश्किल है।


