शरद कटियार
उत्तर प्रदेश दिवस (UP Diwas) केवल एक औपचारिक आयोजन (formal event) भर नहीं है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकासशील चेतना का प्रतीक है, जिसने भारत की आत्मा को आकार दिया है। वर्ष 2026 का यूपी दिवस इस दृष्टि से विशेष रहा कि इसमें अतीत की गौरवशाली परंपरा, वर्तमान की उपलब्धियां और भविष्य की संभावनाएं—तीनों का समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
राजधानी लखनऊ में आयोजित भव्य समारोह ने यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या या भूगोल के आधार पर नहीं, बल्कि पहचान, प्रतिभा और प्रगति के आधार पर अपनी नई छवि गढ़ रहा है। ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ (ओडीओसी) जैसी पहल इस बात का प्रमाण है कि विकास का रास्ता केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि स्थानीय पहचान और परंपरा से भी निकलता है। हर जिले के विशिष्ट व्यंजन को पहचान देना केवल स्वाद या पर्यटन का विषय नहीं है, बल्कि यह स्थानीय रोजगार, महिला स्वावलंबन, कुटीर उद्योग और सांस्कृतिक संरक्षण से सीधे जुड़ा हुआ कदम है।
उत्तर प्रदेश का हर अंचल—ब्रज, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल—अपनी अलग स्वाद परंपरा रखता है। यदि इन्हें ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ा गया, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। ओडीओसी दरअसल “लोकल से ग्लोबल” की सोच का व्यावहारिक रूप है। यूपी दिवस पर जिन पांच विभूतियों को ‘उत्तर प्रदेश गौरव’ से सम्मानित किया गया, वे अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं—अंतरिक्ष, शिक्षा, नवाचार, साहित्य और कृषि। यह चयन अपने आप में एक संदेश है कि विकास का अर्थ केवल इमारतें या सड़कें नहीं, बल्कि मानव प्रतिभा का उत्थान है।
जब कोई युवा अंतरिक्ष तक पहुंचता है, कोई शिक्षा को व्यवसाय और सेवा का माध्यम बनाता है, कोई साहित्य के जरिए समाज को दिशा देता है, और कोई कृषि में नवाचार करता है—तो वह पूरी पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन जाता है। ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और आत्मविश्वास पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलाधिकारियों का सम्मान प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति को मजबूत करता है। यह संकेत है कि अब केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारना और युवाओं को वास्तविक लाभ पहुंचाना ही सफलता का पैमाना होगा।
युवा उद्यमिता उत्तर प्रदेश के लिए सबसे बड़ा अवसर है। यदि प्रशासन मार्गदर्शक और सहयोगी की भूमिका निभाए, तो प्रदेश का युवा वर्ग नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन सकता है। ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ योजना का शुभारंभ इस बात का संकेत है कि सरकार रोजगार और उद्योग को एक-दूसरे से जोड़कर देख रही है। औद्योगिक क्षेत्र तभी सफल होते हैं, जब वे स्थानीय युवाओं को अवसर दें और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखें।
यदि यह योजना पारदर्शिता, भूमि-सुलभता, निवेश सुरक्षा और कौशल विकास के साथ आगे बढ़ती है, तो यह उत्तर प्रदेश को औद्योगिक मानचित्र पर नई ऊंचाई दे सकती है। यूपी दिवस का सांस्कृतिक पक्ष केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की आत्मा का उत्सव था। ब्रज, बुंदेली, अवधी और भोजपुरी की एक मंच पर उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि विविधता ही उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग बोलियां, परंपराएं और लोककलाएं—सब मिलकर एक समग्र उत्तर प्रदेश का निर्माण करती हैं।
यूपी दिवस–2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश अब अपनी पहचान को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है—
परंपरा से प्रेरणा,
प्रतिभा को सम्मान,
युवाओं को अवसर,
और विकास को दिशा।
चुनौती अब यह है कि इन घोषणाओं, योजनाओं और आयोजनों को निरंतरता और ईमानदारी के साथ जमीन पर उतारा जाए। यदि ऐसा हुआ, तो “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” केवल नारा नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की सच्चाई बन सकता है।


