– “धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश बर्दाश्त नहीं”
लखनऊ: सोनीपत–प्रयागराज (Sonipat-Prayagraj) से जुड़े हालिया विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने बेहद सीधे, स्पष्ट और कड़े शब्दों में अपना पक्ष रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा—“संन्यासी के जीवन में धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। संन्यास का अर्थ ही त्याग है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि संन्यासी का जीवन व्यक्तिगत सुख-सुविधा या स्वार्थ से जुड़ा नहीं होता, बल्कि वह समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित होता है। सीएम योगी ने कहा—“संन्यासी के पास न कोई निजी संपत्ति होती है और न ही व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा। उसका स्वाभिमान ही राष्ट्र होता है।” मुख्यमंत्री के इस बयान को मौजूदा विवाद के संदर्भ में संत परंपरा की मर्यादा को स्पष्ट करने वाला संदेश माना जा रहा है।
‘कालनेमि’ बनकर सनातन को बदनाम करने वालों पर निशाना
मुख्यमंत्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा—“आज बहुत से लोग कालनेमि बनकर सनातन धर्म को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे तत्वों को पहचानने और उनसे सावधान रहने की जरूरत है।”उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा हजारों वर्षों से त्याग, तपस्या और लोककल्याण पर आधारित रही है, उसे बदनाम करने का प्रयास समाज के लिए घातक है।
परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं होगी
सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा “किसी को भी सनातन की परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। साधु-संतों के लिए धर्म ही सर्वोपरि है।” मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि राष्ट्र ही संन्यासी का स्वाभिमान है, और जो इस मूल भावना को नहीं समझते, वे सनातन के प्रतिनिधि नहीं हो सकते।
सोनीपत–प्रयागराज विवाद से जोड़कर अहम बयान
मुख्यमंत्री का यह बयान सोनीपत और प्रयागराज से जुड़े विवाद के बीच आया है, जिसे राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष (सीधी बात)
सनातन पर कोई समझौता नहीं
संन्यास = त्याग + धर्म + राष्ट्र
परंपराओं को तोड़ने वालों को छूट नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी का यह बयान न सिर्फ विवाद पर सरकार का रुख स्पष्ट करता है, बल्कि सनातन और संन्यास की परिभाषा भी साफ-साफ जनता के सामने रखता है।


