शरद कटियार
उत्तर प्रदेश दिवस (UP Day) केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उस राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सख्ती और दीर्घकालिक दृष्टि का प्रतीक है, जिसने कभी “बीमारू राज्य” कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश को आज देश का सबसे भरोसेमंद निवेश (reliable investment) गंतव्य बना दिया है। यह परिवर्तन आकस्मिक नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी, चरणबद्ध और परिणामोन्मुख रणनीति का परिणाम है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर शासन में स्पष्टता हो, निर्णय समय पर हों और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता न किया जाए, तो सबसे कठिन माने जाने वाले राज्य भी विकास की मिसाल बन सकते हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान फाइलों में उलझे उद्योग, अधूरी परियोजनाएं और रोजगार के लिए पलायन करते युवा थे। निवेशक यूपी को संभावनाओं का प्रदेश तो मानते थे, लेकिन भरोसे का नहीं। योगी सरकार ने सबसे पहले इसी भरोसे के संकट पर काम किया।
कानून-व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी प्रशासन और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की ठोस व्यवस्था ने निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि उत्तर प्रदेश अब केवल वादे नहीं, परिणाम देता है। 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक पहुंचते-पहुंचते ₹45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों में बदल चुकी है। यह आंकड़ा अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब निवेशकों की सूची में सबसे ऊपर खड़ा है।
भारतीय विकास मॉडल की एक बड़ी कमजोरी यह रही है कि घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन ज़मीन पर काम कम दिखता है। उत्तर प्रदेश में इस परंपरा को तोड़ा गया।
चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास और हजारों परियोजनाओं का व्यावसायिक संचालन इस बात का संकेत है कि यह सरकार कागज़ से आगे निकल चुकी है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों में निवेश का फैलाव यह दिखाता है कि औद्योगिक नीति केवल कुछ गिने-चुने सेक्टरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक समावेशी औद्योगिक आधार तैयार किया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर बना विकास की रीढ़
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने विकास की गति को नई दिशा दी। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब और ट्रांस-गंगा सिटी जैसी परियोजनाओं ने यह साफ कर दिया कि यूपी अब इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में किसी से पीछे नहीं है। इंफ्रास्ट्रक्चर में यह निवेश केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं, बल्कि उद्योग, रोजगार और क्षेत्रीय संतुलन का आधार बन चुका है।
आत्मनिर्भर भारत का मजबूत स्तंभ
डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन यूनिट, डेटा सेंटर नीति और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार ने उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत स्तंभ बना दिया है। आज उत्तर प्रदेश केवल उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि उत्पादन और तकनीकी क्षमता का केंद्र बनता जा रहा है। यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी रोजगार और तकनीकी नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करता है।
शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विकास अब केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई जैसे पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों और निवेश परियोजनाओं की मौजूदगी यह बताती है कि प्रदेश में पहली बार संतुलित विकास जमीन पर उतर रहा है। उत्तर प्रदेश का यह बदलाव किसी एक आयोजन या आंकड़े का परिणाम नहीं है। यह उस राजनीतिक संकल्प का नतीजा है, जिसने निवेश को नारे से निकालकर नीति बनाया और नीति को परिणाम में बदला।
यूपी दिवस पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उत्तर प्रदेश अब अपनी पुरानी छवि से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। आज यह राज्य केवल भारत की अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी गति और दिशा तय करने वाला केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।


