– अब तक 60 लाख से अधिक बार लिखा राम नाम
– हर साल 2 लाख 21 हजार बार करते हैं नाम जप
अमेठी। जनपद से भक्ति और आस्था की एक ऐसी अनूठी मिसाल सामने आई है, जो आज के दौर में विरले ही देखने को मिलती है। अमेठी के निजामुद्दीनपुर गांव निवासी बुजुर्ग रामचंद्र पिछले 27 वर्षों से लगातार ‘सीताराम’ लिखते आ रहे हैं।
रामचंद्र ने भक्ति को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने जीवन की दिनचर्या बना लिया। वे प्रतिदिन नियत समय पर बैठकर कागज पर ‘सीताराम’ लिखते हैं। यह साधना आज एक तपस्या का रूप ले चुकी है।
रामचंद्र अब तक 60 लाख से अधिक बार ‘सीताराम’ लिख चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार वे हर वर्ष लगभग 2 लाख 21 हजार बार राम नाम लिखते हैं। यह क्रम न किसी दिखावे के लिए है और न ही किसी पुरस्कार की चाह में, बल्कि यह उनकी अटूट श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है।
भक्ति बनी जीवन का आधार
रामचंद्र बताते हैं कि राम नाम लिखने से उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक संतोष मिलता है। उनका मानना है कि—“राम नाम लिखना ही मेरी साधना है, यही मेरी भक्ति है।”गांव के लोग बताते हैं कि रामचंद्र का जीवन बेहद सादा है। वे सुबह से लेकर शाम तक अपने दैनिक कार्यों के साथ-साथ राम नाम लेखन को कभी नहीं छोड़ते, चाहे मौसम कोई भी हो।
निजामुद्दीनपुर गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी रामचंद्र की यह भक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी साधना नई पीढ़ी के लिए अनुशासन, धैर्य और श्रद्धा की सीख देती है। कई लोग उनके पास बैठकर कुछ समय राम नाम लिखने की प्रेरणा भी लेते हैं।
भक्ति की मिसाल बना अमेठी
आज जब जीवन भागदौड़ और तनाव से भरा है, ऐसे समय में अमेठी के रामचंद्र की यह साधना यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति साधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि मन की श्रद्धा और निरंतरता ही सबसे बड़ा साधन है।
राम नाम लेखन की यह अनूठी साधना न सिर्फ अमेठी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए भक्ति, संयम और आस्था की प्रेरक कहानी बन गई है।




