फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण की स्पष्ट सिफारिश के बावजूद खटीक समाज के एक युवक का जाति प्रमाण पत्र अब तक जारी न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामला कमालगंज तहसील क्षेत्र के नई बस्ती, महरूपुर रावी निवासी विशाल कुमार पुत्र स्व. नरेश चंद्र से जुड़ा है, जो अनुसूचित जाति के अंतर्गत खटीक समाज से आते हैं।
समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने जिलाधिकारी फर्रुखाबाद को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि खटीक समाज के पात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए। पत्र में विशेष रूप से विशाल कुमार के आवेदन का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद विशाल कुमार का प्रमाण पत्र आज तक लंबित है।
किन्हें मिल गए प्रमाण पत्र?
मंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने आयुष कुमार, रोशनी, सुनील कुमार, जगजीत और मृदुल समेत कई अन्य लोगों के जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए। ये सभी फर्रुखाबाद जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी हैं और खटीक समाज से संबंध रखते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब समान परिस्थितियों में अन्य लोगों को प्रमाण पत्र मिल गया, तो विशाल कुमार को क्यों वंचित रखा गया?
पीड़ित विशाल कुमार का आरोप है कि उन्होंने आयुष कुमार हिडौली के साथ ही अपना आवेदन भी जाति प्रमाण पत्र के लिए दिया था, लेकिन उनका प्रकरण जानबूझकर लटकाया जा रहा है। विशाल कुमार ने आरोप लगाया कि लेखपाल बिना रिश्वत के जाति प्रमाण पत्र नहीं बना रहे हैं, जबकि अन्य लोगों के प्रमाण पत्र कथित रूप से रुपये लेकर जारी कर दिए गए।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने कई बार तहसील और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार “जांच चल रही है” कहकर टाल दिया गया।
इस पूरे प्रकरण ने राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह भी है कि जब एक मंत्री की सिफारिश पर कार्रवाई हो सकती है, तो फिर एक ही समाज के एक व्यक्ति के साथ अलग व्यवहार क्यों?
क्या यह महज लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का संगठित खेल?
विशाल कुमार ने जिलाधिकारी फर्रुखाबाद और प्रशासन से मांग की है कि उनका जाति प्रमाण पत्र शीघ्र जारी किया जाए, ताकि वे सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और अन्य संवैधानिक अधिकारों से वंचित न रहें। उनका कहना है कि जाति प्रमाण पत्र न होने के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है।




