86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन
लखनऊ। कभी ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। यह परिवर्तन केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि शासन, नीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है। यह बात मंगलवार को विधानसभा परिसर में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में सामने आई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में न केवल आर्थिक मोर्चे पर मजबूती हासिल की है, बल्कि आधारभूत ढांचे को भी नई दिशा दी है। सड़क, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों और शहरी विकास के क्षेत्र में किए गए कार्यों ने प्रदेश की तस्वीर बदली है। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि विकास की इस यात्रा में संवाद की भूमिका सबसे अहम है।
लोकतंत्र की आत्मा है विधायिका
सम्मेलन के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि भारत की संसद दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है और हमारी विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। जनप्रतिनिधियों के आचरण, संवाद और निर्णय प्रक्रिया से ही लोकतंत्र मजबूत होता है। पीठासीन अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल सदन संचालन तक सीमित नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं और गरिमा की रक्षा भी उनकी प्रमुख भूमिका है।
वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए संवाद, सहमति और असहमति—तीनों आवश्यक हैं। यदि संवाद टूटता है, तो व्यवस्था कमजोर होती है। इसी कारण विधानसभाओं और संसद में सकारात्मक बहस और मर्यादित आचरण समय की मांग है।
कभी पिछड़ेपन, अव्यवस्था और वित्तीय संकट के लिए पहचाना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुधारों के लिए चर्चा में है। रेवेन्यू सरप्लस राज्य बनना इस बदलाव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इसे सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया और कहा कि केंद्र व राज्य के बीच समन्वय, स्पष्ट नीतियां और पारदर्शी शासन ने यह संभव बनाया है।
21 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश विधान सभा, लखनऊ में आयोजित इस सम्मेलन का समापन लोकतंत्र को और सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ। यह संदेश साफ था—विकास, संवाद और लोकतांत्रिक मर्यादा एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि विधायिका मजबूत होगी, तो शासन भी मजबूत होगा और तभी देश व प्रदेश प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here