नई दिल्ली| विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बेरेस से मुलाकात की। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि भारत और स्पेन दोनों ही आतंकवाद के शिकार रहे हैं, इसलिए पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता यानी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में साझा चुनौतियों से मिलकर लड़ने पर जोर दिया।
जयशंकर ने 18 जनवरी को स्पेन के कॉर्डोबा में हुए भीषण ट्रेन हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया, जिसमें 40 लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। यह हादसा उस समय हुआ था, जब एक ट्रेन पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन से टकरा गई। दुर्घटनाग्रस्त ट्रेनों में से एक में मलागा से मैड्रिड तक लगभग 300 यात्री सवार थे, जबकि दूसरी ट्रेन में मैड्रिड से हुएल्वा जाने वाले करीब 200 यात्री मौजूद थे।
विदेश मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 भारत-स्पेन संबंधों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इस अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को समर्पित दोहरा वर्ष भी मनाया जा रहा है। जयशंकर ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए एक विशेष लोगो भी लॉन्च किया, जिसे प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया है।
रक्षा सहयोग पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ सी-295 विमान इस वर्ष सितंबर से पहले तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वडोदरा में इसकी फैक्ट्री का उद्घाटन अक्टूबर 2024 में किया गया था। एआई के क्षेत्र में सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अगले महीने एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेगा और भारत एआई के जिम्मेदार व नैतिक इस्तेमाल का समर्थक है, जो यूरोप की सोच से भी मेल खाता है।
व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि स्पेन भारत का एक अहम व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच 8 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार होता है। स्पेन की कंपनियां भारत में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय हैं, जबकि भारतीय कंपनियां भी स्पेन में अपना विस्तार कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्पेन में योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता तथा भारत में स्पेनिश भाषा और संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि, दोनों समाजों के बीच मजबूत लोगों-से-लोगों के संबंधों को दर्शाती है।





