शाहजहांपुर: जानलेवा चीनी मांझे (Chinese thread) की अवैध बिक्री और प्रशासनिक चुप्पी के विरोध में समाजसेवी नबी सलमान ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर (Collectorate Complex) में सांकेतिक हड़ताल शुरू की। इस दौरान विकास भवन के गेट के पास चीनी मांझे से बनी प्रतीकात्मक पतंग का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया गया। नबी सलमान ने कहा कि चीनी मांझा अब त्योहारों से जुड़ा साधन नहीं, बल्कि मौत का फंदा बन चुका है। हर वर्ष इसके कारण लोगों की गर्दनें कटती हैं, राह चलते लोग घायल होते हैं, पक्षी मारे जाते हैं और कई बार निर्दोष नागरिकों की जान तक चली जाती है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई केवल कागजी साबित हो रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब चीनी मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध है, तो यह बाजारों में खुलेआम कैसे बिक रहा है। क्या इसकी बिक्री को कहीं न कहीं प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगी। नबी सलमान ने मांग की कि चीनी मांझा बेचने वालों पर रासुका जैसी कठोर कार्रवाई की जाए, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और पूरे जनपद में विशेष अभियान चलाकर इसकी एक-एक रील जब्त की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने अब भी गंभीरता नहीं दिखाई, तो यह सांकेतिक हड़ताल जन आंदोलन में तब्दील कर दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
धरना दूसरे दिन भी रहा जारी
कलेक्ट्रेट परिसर में उनके धरने को आमजन का समर्थन मिला। मौजूद लोगों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए चीनी मांझे के पूर्ण बहिष्कार की मांग की। साथ ही यह मुद्दा भी उठाया गया कि शहीदों की प्रतिमाओं की नियमित सफाई नहीं हो रही है, दीवारों पर अव्यवस्थित चित्र बने हैं और सार्वजनिक स्थानों पर नालियों के किनारे राजनीतिक बैनर लगाए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि प्रशासन एक ओर सख्ती की चेतावनी देता है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर आवारा गोवंश खुलेआम घूमते नजर आते हैं। चेतावनी दी गई कि यदि इन मामलों में भी सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा। धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं दिए जाने से प्रदर्शनकारियों में रोष बना हुआ है।


