शरद कटियार
भारतीय राजनीति (indian politics) लंबे समय तक अनुभव और उम्र के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ है कि ऊर्जा, संगठन कौशल और ज़मीनी जुड़ाव भी उतने ही जरूरी हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 45 वर्षीय नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर इसी बदलते राजनीतिक यथार्थ को स्वीकार किया है। यह फैसला केवल एक व्यक्ति के चयन का नहीं, बल्कि युवा राजनीति को खुली हवा देने का स्पष्ट संकेत है।
युवा नेतृत्व का राजनीतिक संदेश
नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना भाजपा की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें पार्टी आने वाले एक–दो दशक की राजनीति की तैयारी कर रही है। 45 वर्ष की उम्र आज की राजनीति में “युवा” की श्रेणी में आती है, खासकर तब, जब देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। ऐसे में पार्टी का नेतृत्व अपेक्षाकृत युवा हाथों में देना, सीधे तौर पर युवा मतदाता और कार्यकर्ता वर्ग से संवाद स्थापित करने की कोशिश है।आंकड़ों में भाजपा और युवा शक्ति भाजपा के साथ देशभर में 12 करोड़ से अधिक पंजीकृत सदस्य जुड़े हैं।
इनमें से अनुमानित 55–60 प्रतिशत सदस्य 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं।देश के 10 लाख से अधिक बूथों पर भाजपा का संगठनात्मक ढांचा सक्रिय है, जहां युवा कार्यकर्ता रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। हाल के सदस्यता अभियानों में हर बूथ पर औसतन 40–50 युवा कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुड़े पाए गए। इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा का संगठन पहले से ही युवा शक्ति पर टिका है, और नितिन नवीन का चयन उसी वास्तविकता को शीर्ष नेतृत्व तक ले आता है।
अनुभव और ऊर्जा का संतुलन
नितिन नवीन की राजनीतिक यात्रा यह बताती है कि वह केवल उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ता पृष्ठभूमि के कारण आगे आए हैं। भाजपा में उनका सफर बूथ और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से होकर शीर्ष तक पहुंचा है। यही कारण है कि उनके निर्विरोध चयन को पार्टी के भीतर व्यापक सहमति मिली। यह संकेत देता है कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन टकराव से नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन से होता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में—पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं की संख्या करोड़ों में होगी,डिजिटल और सोशल मीडिया आधारित राजनीति और मजबूत होगी,रोजगार, शिक्षा, तकनीक और उद्यमिता जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। नितिन नवीन जैसे अपेक्षाकृत युवा अध्यक्ष से पार्टी इन विषयों पर अधिक प्रभावी संवाद स्थापित करने की स्थिति में आ सकती है।
हालांकि युवा नेतृत्व अपने साथ उम्मीदें लाता है, लेकिन चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व संभालना आसान नहीं। संगठन की विशालता, विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां और आगामी चुनाव—ये सभी नितिन नवीन के नेतृत्व की असली परीक्षा होंगे। युवा राजनीति को हवा देना तभी सार्थक होगा, जब वह स्थिरता, अनुशासन और परिणाम के साथ आगे बढ़े।
45 वर्षीय नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी भविष्य की राजनीति को केवल देख नहीं रही, बल्कि उसे गढ़ने की तैयारी में है। यह फैसला संकेत देता है कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन के साथ-साथ युवा नेतृत्व को भी केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है। आने वाला समय बताएगा कि यह युवा प्रयोग किस हद तक भारतीय राजनीति की दिशा बदल पाता है, लेकिन इतना तय है कि इस फैसले ने राजनीतिक विमर्श को नई गति जरूर दे दी है।


