वाराणसी| मणिकर्णिका घाट से जुड़ी भ्रामक टिप्पणी और एआई जनरेटेड वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले में कमिश्नरेट पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर स्थित कुंभ महादेव मंदिर का वीडियो मणिकर्णिका घाट का बताकर वायरल किए जाने पर चौक थाने की पुलिस ने संज्ञान लेते हुए आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी व राज्यसभा सांसद संजय सिंह, बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव सहित कुल आठ लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी को तीन दिन के भीतर चौक थाने में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। इससे पहले शनिवार को पुलिस ने दो सांसदों समेत आठ नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में स्थापित कुंभ महादेव मंदिर को मणिकर्णिका घाट से जोड़कर भ्रामक पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। ऐसे कंटेंट से धार्मिक भावनाएं भड़काने और सद्भाव बिगाड़ने की आशंका को देखते हुए काशी जोन की दो विशेष टीमें सोशल मीडिया की निगरानी में लगाई गई हैं। इसी निगरानी के दौरान फर्जी तस्वीर और वीडियो साझा किए जाने का मामला सामने आया, जिसके बाद नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई।
डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल ने बताया कि खंडित मूर्ति और मंदिरों को बेवजह मणिकर्णिका घाट से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि कुंभ महादेव मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है और वहां नियमित पूजा-अर्चना हो रही है। उन्होंने कहा कि मंदिर को क्षतिग्रस्त बताकर फैलाया जा रहा प्रचार धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश का हिस्सा है। ऐसे पोस्ट और टिप्पणियां करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
इस मामले में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए लिखा कि एक तरफ कहा जा रहा है कि कुछ नहीं हुआ, दूसरी तरफ यह वीडियो सच्चाई बयां कर रहा है। झूठ के साथ यही सबसे बड़ी समस्या होती है कि उसे छुपाने के लिए कई रूप अपनाने पड़ते हैं।
उधर, मणिकर्णिका घाट पर माता अहिल्याबाई की मूर्ति से जुड़े विवाद के बाद हरिश्चंद्र घाट पर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां मौजूद छोटे-बड़े मंदिरों और मूर्तियों की शिफ्टिंग का काम फिलहाल रोक दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पहले यहां मंदिरों को हटाकर शवों के अंतिम संस्कार के लिए प्लेटफॉर्म बनाने की योजना थी, जिसे कार्यदायी संस्था द्वारा कराया जाना था। अब सभी पहलुओं पर बैठक के बाद आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। वहीं, बीएचयू विश्वनाथ मंदिर के बाहर प्रदर्शन कर अहिल्याबाई घाट के संरक्षण की मांग भी उठाई गई है।





