चंदौली: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था (judicial system) से जुड़े कार्यों को पूरा करने में अब देरी नहीं की जाती। सरकार का स्पष्ट मानना है कि सुशासन के लिए मजबूत और आधुनिक न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है और इसके लिए किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी।
शनिवार को देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में चंदौली में छह जिलों—चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया—के लिए एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न भेंट कर सभी न्यायमूर्तियों का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी को सरल और सहज रूप से न्याय मिले, इसके लिए बेहतर सुविधाएं और आधुनिक कोर्ट परिसर आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में न्यायपालिका के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण दिन है और इससे न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
सीएम योगी ने बताया कि एकीकृत न्यायालय परिसरों में एक ही छत के नीचे कोर्ट कॉम्प्लेक्स, अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, कैंटीन, पार्किंग और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अब अधिवक्ताओं को जर्जर और टूटे हुए चैंबरों में काम नहीं करना पड़ेगा, बल्कि हाईराइज बिल्डिंग में बेहतर व्यवस्था मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है और न्यायिक कार्यों के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है और आगे चलकर इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीश, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।


