फर्रुखाबाद। कौमी यकजहती और आपसी भाईचारे की मिसाल दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में एक अजीमुश्शान जलसा-ए-मेराजुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का इन्काद हुआ जिसकी सदारत सज्जादानशीन कारी शाह फसीह मुजीबी ने की संचालन हाफिज़ शाहिद रज़ा ने किया। जलसे का आगाज़ कारी सय्यद मोहम्मद हारुन की तिलावते कुरान-ए-पाक से हुआ। जिसमे मकामी व बैरुनी नामवर उलमा व शोरा तशरीफ लाये । मुकरिर्र खुसूसी कारी हाजी मुख्तार आलम कादरी ने मेराज शरीफ की अहमियत पर तफसील से रौशनी डाली। और कहा कि मेराज के बारे में मुसलमानों को खूब खूब जानना चाहिये, इसलिए कि ये उनकी मेराज है कि जिनके सदके में सारी इंसानियत को मेराज अता की गयी। उन्होंने आगे फरमाया कि ये उनकी मेराज का जश्न है जो अमन और शांति के पैग़म्बर हैं और सारी दुनिया के लिए रहमत हैं। अगर आज भी दुनिया उनके दामन से वाबस्ता हो जाये और उनके बताये हुए रास्ते पर चले तो दुनिया में आज भी अमन, शांति और सुकून हो जाये। जिस मेराज का ये जश्न हम मना रहे हैं ये मेराज जिस्मानी मेराज थी। उन्होंने नमाज की अहमियत पर ज़ोर देते हुए फरमाया कि ऐ लोगों अपनी पेशानी में सजों की तड़प पैदा करो, नमाज़ की पाबंदी करो, अपने रब के आगे सजदा करो ।
बाहर के शोरा किराम हाफिज़ फैजान रजा, सय्यद हिलाल मुजीबी, काज़ी सय्यद मुताहिर अली, कारी तनवीर रजा, कारी शाकिर कादरी, सय्यद अख्ज़र अली, सय्यद शुऐब अली, आफताब कादरी, आफाक़ कादरी ने नातिया कलाम पेश किया ।
हाजी मुन्ना वेलकम,.. हाजी भोले, हाजी तौफीक, हफीज़ भाई, सूफी मुशर्रफ, मुश्शू मियाँ मुजीबी अज्जू मियाँ, मेराज खां, राशिद मुजीबी, आफाक़ रहमानी के अलावा काफी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की। जलसे का इख्तिताम सलातो व सलाम और साहिबे सज्जादा की दुआ पर हुआ । बज़्मे मुजीबुल अदब ने जलसे का सारा एहतिमाम किया और आने वाले लोगों का शुक्रिया अदा किया।





