फर्रुखाबाद। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश किसान सभा के बैनर तले किसानों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के उपरांत किसानों ने राष्ट्रपति को संबोधित 13 सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से सौंपते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्रित किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियां किसान, मजदूर और आमजन विरोधी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा समय में खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है, लेकिन सरकार किसानों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है।
ज्ञापन में किसानों ने बीज विधेयक–2025, बिजली बिल–2025, वीबीजी–राम–जी–2025 तथा चारों श्रम संहिता (लेबर कोड) विधेयक–2025 का कड़ा विरोध किया। किसान नेताओं ने कहा कि ये सभी विधेयक किसानों और श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने वाले हैं और इससे खेती तथा रोजगार दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
किसानों ने मांग की कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए। इसके साथ ही किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी, खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए आवश्यक संसाधनों पर सब्सिडी बढ़ाने तथा आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाए जाने की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में शिक्षा के सार्वभौमिकीकरण और राष्ट्रीयकरण की मांग करते हुए सभी के लिए मुफ्त और सर्वसुलभ शिक्षा सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया गया। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार की गारंटी, केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को शीघ्र भरे जाने तथा निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाने की मांग की गई।
किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकार को साम्राज्यवादी देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि इन समझौतों से देश की कृषि, लघु उद्योग और घरेलू बाजार को भारी नुकसान हो रहा है।
प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान कामरेड बलवीर सिंह, कामरेड प्रमोद कुमार शाक्य, कामरेड रामकुमार, कामरेड नरवीर सिंह, कामरेड संतोष कुमार, डॉ. रक्षपाल सिंह, अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान व संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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