चंदौली। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को चंदौली सहित प्रदेश के छह जनपदों—शामली, औरैया, महोबा, अमेठी और हाथरस—में लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास किया। इस अवसर को प्रदेश में न्यायिक ढांचे को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली के साथ सुप्रीम कोर्ट के पांच और उच्च न्यायालय के 18 अन्य न्यायाधीश भी उपस्थित रहे।
चंदौली जनपद में 236 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त न्यायालय परिसर, न्यायिक अधिकारियों के आवास तथा अधिवक्ताओं के लिए चैंबरों का निर्माण कराया जाएगा। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय की पहुंच को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ये न्यायालय परिसर आने वाले लगभग पचास वर्षों तक जिले की न्यायिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होंगे और आम नागरिकों को सहज, सुलभ और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराएंगे।
उन्होंने कहा कि चंदौली क्षेत्र बाबा कीनाराम के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है और अब यहां न्याय के मंदिरों की स्थापना से इतिहास में एक नई कड़ी जुड़ रही है। यह आधुनिक जिला न्यायालय परिसर न केवल न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य आम आदमी को त्वरित और सुलभ न्याय प्रदान करना है, जो ‘एक्सेस टू जस्टिस’ की भावना को साकार करता है।
प्रधान न्यायाधीश ने उत्तर प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संविधान ने न्यायपालिका को विशेष स्थान दिया है और इसकी मंशा रही है कि जिला स्तर पर मजबूत न्यायिक ढांचा हो, ताकि नागरिकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दूर न जाना पड़े। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में कुल दस इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स की घोषणा की गई है, जिनमें से छह का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इनके पूर्ण होने पर उत्तर प्रदेश देशभर के लिए एक आदर्श मॉडल बनेगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि वे अन्य राज्यों की यात्राओं के दौरान वहां की राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों से इस प्रकार के आधुनिक न्यायालय परिसरों को अपनाने का आग्रह करेंगे। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिला न्यायालय परिसर में महिला अधिवक्ताओं के लिए पृथक बार रूम, स्वास्थ्य केंद्र और योग केंद्र की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे वरिष्ठ नागरिकों और आकस्मिक परिस्थितियों में न्यायालय आने वाले लोगों को राहत मिल सके। अंत में उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये न्यायालय परिसर सही मायनों में न्याय के मंदिर सिद्ध होंगे और यहां से निष्पक्ष, स्वतंत्र और सशक्त न्याय का संदेश पूरे देश में जाएगा।






