11 C
Lucknow
Friday, January 16, 2026

यौन शिक्षा: मौन तोड़ने की ज़रूरत

Must read

राही समर्थ

भारतीय समाज में “यौन शिक्षा” (Sex education) आज भी एक असहज विषय माना जाता है। इसे अक्सर संकोच, शर्म या गलत धारणाओं के चश्मे से देखा जाता है, जबकि सच यह है कि यौन शिक्षा किसी भी समाज के स्वस्थ, सुरक्षित और जागरूक भविष्य की बुनियाद है। यह केवल यौन संबंधों की जानकारी नहीं, बल्कि शरीर की समझ, सम्मान, सहमति, स्वास्थ्य और सुरक्षा का समग्र ज्ञान है।

यौन शिक्षा क्यों ज़रूरी है?

किशोरावस्था में शरीर और मन में तेज़ बदलाव आते हैं। यदि इस दौर में सही जानकारी न मिले, तो बच्चे भ्रम, डर या गलत स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं। इंटरनेट और अफवाहें अक्सर अधूरी या गलत जानकारी देती हैं, जिसका परिणाम असुरक्षित व्यवहार, मानसिक तनाव और शोषण के रूप में सामने आता है। यौन शिक्षा गलत धारणाओं को तोड़ती है, आत्मविश्वास बढ़ाती है और बच्चों को अपने शरीर की सीमाओं को समझने में मदद करती है।

यौन शिक्षा का सबसे अहम पहलू है—सहमति (Consent)। यह सिखाती है कि किसी भी रिश्ते में “हाँ” का अर्थ क्या है और “ना” का सम्मान कैसे किया जाता है। इससे यौन हिंसा, छेड़छाड़ और शोषण जैसी समस्याओं पर अंकुश लगता है। साथ ही, लैंगिक समानता और परस्पर सम्मान की भावना मजबूत होती है।

सही यौन शिक्षा से किशोर और युवा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, संक्रमणों से बचाव, स्वच्छता, और समय पर चिकित्सा सहायता के महत्व को समझते हैं। यह अवांछित गर्भधारण और यौन रोगों की रोकथाम में भी निर्णायक भूमिका निभाती है।

अक्सर माता-पिता और शिक्षक इस विषय पर बात करने से कतराते हैं। लेकिन चुप्पी समस्या का समाधान नहीं है। खुले, उम्र-उपयुक्त और वैज्ञानिक संवाद से बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं और सही प्रश्न पूछ पाते हैं। स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा पाठ्यक्रम आधारित यौन शिक्षा और घर में भरोसेमंद बातचीत—दोनों जरूरी हैं।

एक आम गलतफहमी यह है कि यौन शिक्षा बच्चों को “भटका” देती है। शोध बताते हैं कि सही जानकारी मिलने से बच्चे अधिक जिम्मेदार बनते हैं, जोखिम कम लेते हैं और निर्णय बेहतर करते हैं। जानकारी रोकना नहीं, सही जानकारी देना ही सुरक्षा है। यौन शिक्षा कोई वर्जित विषय नहीं, बल्कि जीवन कौशल है। इसे स्वीकार करना, समझदारी से लागू करना और समाज में खुला संवाद शुरू करना समय की मांग है।

जब हम बच्चों को ज्ञान देंगे, तभी वे सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ भविष्य चुन पाएंगे।

मौन नहीं, मार्गदर्शन—यही यौन शिक्षा का सार है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article