नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं केवल शासन की व्यवस्था नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास की मजबूत नींव हैं। लोकतंत्र ने भारत को स्थिरता, गति और व्यापक विस्तार प्रदान किया है, जिसके कारण आज देश वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा है। प्रधानमंत्री नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित 28वीं राष्ट्रमंडल स्पीकर्स एवं पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में यह सम्मेलन आयोजित हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है। स्वतंत्रता से पहले यहीं संविधान सभा की बैठकें हुईं और आजादी के बाद 75 वर्षों तक इसी भवन से देश की संसद का संचालन हुआ। अब इस ऐतिहासिक स्थल को संविधान सदन के रूप में लोकतंत्र को समर्पित किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और वर्ष 2024 में हुए आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास रहे। करीब 98 करोड़ नागरिकों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया, जो कई देशों और महाद्वीपों की आबादी से भी अधिक है। चुनाव में सैकड़ों राजनीतिक दलों और हजारों उम्मीदवारों ने भाग लिया, वहीं महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी ने भारतीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाया।
प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। उन्होंने कहा कि आज भारतीय महिलाएं न केवल लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कभी यह आशंका जताई जाती थी कि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र सफल होगा या नहीं, लेकिन भारत ने विविधता को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बना दिया।
संसदीय व्यवस्था पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उनका दायित्व केवल सदन का संचालन करना नहीं, बल्कि सभी सदस्यों को समान अवसर देना और निष्पक्ष व संतुलित वातावरण बनाए रखना है। धैर्य और सहनशीलता को उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान प्रणाली, वैक्सीन उत्पादन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साबित किया है कि मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं देश को स्थिरता, गति और व्यापक विकास की दिशा देती हैं।
गौरतलब है कि यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला कर रहे हैं। इसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों के 61 स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में संसद की बदलती भूमिका, तकनीकी नवाचार, डिजिटल प्रबंधन और नागरिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।


