झांसी। नगर निगम की कीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर बैनामा कराने के गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। झांसी शहर कोतवाली में 12 महिलाओं समेत कुल 28 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, नाबालिग के नाम तक बैनामा
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने नगर निगम की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर न केवल फर्जी तरीके से बैनामा कराया, बल्कि नाबालिगों के नाम तक जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर पहले से स्टे आदेश लागू था, उसे भी कई बार खरीदा–बेचा गया।
जांच के अनुसार, विवादित जमीन पर न्यायालय का स्टे होने के बावजूद आरोपियों ने साजिश के तहत बार-बार बैनामा कराया। इसके बाद वहां मकानों का निर्माण भी कर लिया गया। इस पूरे समय नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अवैध निर्माण होने के बावजूद किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि अवैध रूप से बने मकानों को नगर निगम द्वारा हाउस नंबर तक जारी कर दिए गए। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि बिना आंतरिक मिलीभगत के यह पूरा खेल संभव नहीं था। मामले के उजागर होने के बाद नगर निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है।
पूरे प्रकरण में शहर कोतवाली झांसी में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी नाम सामने आ सकते हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड, बैनामे से जुड़े दस्तावेज और निर्माण की अनुमति से संबंधित फाइलों की भी जांच की जा रही है।
इस प्रकरण ने नगर निगम की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लोगों का कहना है कि वर्षों तक अवैध कब्जा और निर्माण होता रहा, लेकिन निगम ‘सोता रहा’। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होती है या मामला केवल एफआईआर तक सीमित रह जाता है।


