जोरहाट: भारत–बांग्लादेश सीमा (India–Bangladesh border) के पास एक सैन्य शिविर के सामने प्रस्तावित मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर उठे सुरक्षा संबंधी विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटा दिया है। सेना ने इस अस्पताल के निर्माण पर गंभीर आपत्ति जताते हुए आशंका जताई है कि इसका इस्तेमाल ड्रोन परिचालन और लंबी दूरी की स्नाइपर राइफलों के जरिए सैन्य शिविर की निगरानी या हमले के लिए किया जा सकता है। यह अस्पताल जोरहाट विकास प्राधिकरण द्वारा निजी कंपनी को दी गई एनओसी के आधार पर प्रस्तावित है, जिसे बाद में सेना की आपत्तियों के चलते रद्द कर दिया गया था।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने की। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी और सेना के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा, जबकि अस्पताल बना रही कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे पेश हुए। पीठ ने टिप्पणी की कि एक ओर ‘जन स्वास्थ्य’ का अहम मुद्दा है तो दूसरी ओर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का, और दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अदालत ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर आपसी सहमति से समाधान निकालने का निर्देश दिया।
सेना ने स्पष्ट किया कि वह अस्पताल के निर्माण के पूरी तरह खिलाफ नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में यह उसके जवानों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सेना ने कुछ कड़े सुरक्षा उपायों की शर्त रखी है। एएसजी बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि अस्पताल परिसर के चारों ओर 15 फीट से अधिक ऊंची कंक्रीट की दीवार होनी चाहिए, जिसमें विभाजक लगे हों, और बहुमंजिला इमारत की कोई भी खिड़की सैन्य शिविर की ओर नहीं खुलनी चाहिए।
सेना ने यह भी चेताया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील और अस्थिर हैं। खतरा सिर्फ स्नाइपर राइफलों तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रोन के जरिए सैन्य शिविर की रेकी किए जाने की आशंका भी बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने सेना के एक कर्नल द्वारा दी गई इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि दोनों पक्ष मिलकर ऐसा समाधान निकाल सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना जनस्वास्थ्य की जरूरतें भी पूरी हों।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि अस्पताल निर्माण करने वाली कंपनी को अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के चलते ज्यादा खर्च उठाना पड़ता है, तो केंद्र सरकार उसकी मदद कर सकती है। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से यह भी दलील दी गई कि अस्पताल के लिए खरीदी गई जमीन नगर पालिका क्षेत्र में आती है और शिविर के आसपास पहले से बाजार व अन्य निर्माण मौजूद हैं। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण समाधान के साथ अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।


