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Wednesday, January 14, 2026

इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग में यूपी की मजबूत छलांग, हरित परिवहन की दिशा में निर्णायक कदम

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देश के अग्रणी राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश, 2316 ईवी चार्जिंग स्टेशनों के साथ मजबूत मौजूदगी

योगी सरकार की नीति से पर्यावरण संरक्षण के साथ नए आर्थिक अवसर

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन (green transportation) की दिशा में लगातार ठोस और दूरगामी कदम उठा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने और चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के क्षेत्र में प्रदेश ने बीते पांच वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में अब तक 2,316 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन (electric vehicle charging station) स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे राज्य देश के अग्रणी ईवी-फ्रेंडली राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

यह उपलब्धि न केवल प्रदेश के तीव्र शहरीकरण और औद्योगिक विकास को दर्शाती है, बल्कि योगी सरकार की स्पष्ट नीति, मजबूत विजन और निवेश-अनुकूल वातावरण का भी प्रमाण है। देशभर में स्थापित कुल 29,151 ईवी चार्जिंग स्टेशनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्रदेश में मौजूद 2,316 चार्जिंग स्टेशनों में से 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार ने शहरी के साथ-साथ अर्ध-शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया है।

लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में ईवी चार्जिंग सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों और व्यवसायिक उपयोगकर्ताओं दोनों को सुविधा मिल रही है।

निजी निवेश को मिल रहा प्रोत्साहन

ईवी चार्जिंग सेक्टर में निजी भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। याहवी ग्रुप के सीईओ संदीप यादव के अनुसार उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि याहवी ग्रुप द्वारा मथुरा और वृंदावन में ट्रकों के लिए विशेष ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जो लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को हरित बनाने की दिशा में अहम कदम है।

स्पष्ट नीति और मजबूत विजन

योगी सरकार की प्राथमिकता उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए निवेशकों और निजी कंपनियों को नीति समर्थन, भूमि उपलब्धता, अनुमतियों की सरल प्रक्रिया और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से आकर्षित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि ईवी चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी निवेश के नए द्वार भी खोलता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य के लिए यह पहल पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटने से ईंधन आयात पर होने वाला व्यय कम होगा, जिससे दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

केंद्र सरकार की फेम-1 और फेम-2 योजनाओं के तहत देशभर में 9,576 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनका लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिला है। इसके अतिरिक्त पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ईवी चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे राज्यों को और गति मिलने की उम्मीद है।

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