फर्रुखाबाद। मुख्य मार्ग पर गड़े बिजली के खंभों को सड़क किनारे करने का कार्य इन दिनों विकास के नाम पर कराया जा रहा है, लेकिन इस कार्य ने विद्युत व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सुबह होते ही बिजली काट दी जाती है और शाम ढलने तक आपूर्ति बहाल नहीं हो पाती। नतीजा यह है कि पूरे दिन शहर और कस्बाई इलाकों के लोग बिना बिजली के जीवन गुजारने को मजबूर हैं। बिजली न आने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

विशेष रूप से मिल्क डेयरी फीडर से जुड़े इलाकों में स्थिति और भी बदतर बनी हुई है। यहां खंभे हटाने और शिफ्ट करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। दिन में भी घंटों बिजली गुल रहती है, जबकि रात के समय कई जगह सड़क पर खुले तार पड़े रहते हैं। अंधेरे में ये तार राहगीरों और वाहन चालकों के लिए मौत का फंदा बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है, तभी शायद जिम्मेदार जागेंगे।

सुबह-सुबह काम शुरू होते ही बिजली काट दी जाती है और उपभोक्ताओं को यह भी नहीं बताया जाता कि आपूर्ति कब बहाल होगी। घरेलू कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है। दुकानदार, छोटे कारोबारी और डेयरी संचालक सबसे अधिक परेशान हैं। दूध और अन्य खराब होने वाले सामान को सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

सर्दी के मौसम में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। घरों में पानी भरने का काम देर से होता है, लेकिन बिजली न होने से समरसेबल और मोटर ठप पड़ी रहती हैं। लोगों को मजबूरन हैंडपंप का सहारा लेना पड़ता है या फिर टंकी में पहले से भरा बासी पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति किसी परीक्षा से कम नहीं है। साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि रात के समय खुले पड़े बिजली के तारों पर न तो कोई चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। अंधेरे में निकलने वाले लोग हर कदम पर खतरे से जूझ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन जनता की सुरक्षा और सुविधा को ताक पर रखकर किया गया विकास आखिर किस काम का?

क्षेत्रवासियों ने विद्युत विभाग और संबंधित एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों की मांग है कि खंभे शिफ्ट करने का कार्य सुनियोजित तरीके से किया जाए, ताकि पूरे दिन बिजली काटने की नौबत न आए। साथ ही रात के समय तारों को सुरक्षित कर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनता आंदोलन के लिए मजबूर होगी।

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