लखनऊ| इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 मामले में बड़ा अंतरिम आदेश देते हुए आगे की सभी कार्यवाहियों पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तिथि तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 से संबंधित किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई नहीं करेंगे। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय करते हुए यह भी कहा कि इस अंतरिम आदेश का लाभ न केवल याचिकाकर्ता शिक्षकों को, बल्कि इस याचिका से संबद्ध 11 अन्य याचिकाओं में शामिल शिक्षकों को भी मिलेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दायर याचिका पर दिया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 से संबंधित शासनादेश को चुनौती दी गई है और उसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह शासनादेश नियमों के विरुद्ध है और इससे शिक्षकों को गंभीर नुकसान हो रहा है।
याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एच. जी. एस. परिहार ने कोर्ट को बताया कि यह शासनादेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) तथा बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। उन्होंने दलील दी कि नियम 21 के तहत किसी भी शिक्षक को उसकी सहमति के बिना समायोजित नहीं किया जा सकता, जबकि वर्तमान समायोजन प्रक्रिया में इस नियम की अनदेखी की गई है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और कई प्रकार की प्रशासनिक व व्यावहारिक विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता के आग्रह पर कोर्ट ने मामले को 19 जनवरी को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस बीच याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय भी दे दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से प्रदेश के बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षकों को फिलहाल राहत मिली है और अब सभी की निगाहें 19 जनवरी को होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिकी हैं।




