मुंबई में बनेगा बिहार भवन,सरकारी विभागों में खाली पद भरे जाएंगे।

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गठित नई बिहार सरकार की पहली मंत्रिपरिषद बैठक में कुल 43 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक को राज्य के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास की दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले समय में रोजगार सृजन, निवेश को बढ़ावा देने और विकास कार्यों को गति देना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
कैबिनेट बैठक में सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्रिपरिषद ने यह माना कि बेरोजगारी राज्य की बड़ी समस्या है और सरकारी भर्तियों में तेजी लाकर युवाओं को राहत दी जाएगी। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर भी सहमति बनी। उद्योगों को बढ़ावा देने, नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ठोस नीतिगत फैसले लिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मुंबई में बिहार भवन का निर्माण कराया जाएगा, जिससे वहां रहने वाले बिहार के लोगों को प्रशासनिक और सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। यह फैसला राज्य के बाहर रहने वाले प्रवासी बिहारियों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
मंत्रिपरिषद की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान एनडीए द्वारा जनता से किए गए वादों को अमलीजामा पहनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि नए साल में विकास, रोजगार और निवेश ही उसकी प्राथमिकता की धुरी होंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि इन फैसलों से न केवल आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही निवेश बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कैबिनेट के ये फैसले आने वाले समय में बिहार के विकास एजेंडे के साथ-साथ भविष्य के चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं।

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