
नई दिल्लीl गुजरात दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित शौर्य यात्रा में भाग लेकर देश की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और वीरता के गौरवशाली इतिहास को नमन किया। यह आयोजन उन असंख्य वीरों की स्मृति को समर्पित रहा, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। एक किलोमीटर लंबी शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक सवारी शामिल रही, जिसे वीरता, साहस और त्याग का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय, सृजन और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से स्थापित हुआ। इतनी सदियों का संघर्ष, धैर्य और पुनर्निर्माण की यह जीवट शक्ति विश्व इतिहास में दुर्लभ उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा कि आज भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहराती ध्वजा यह उद्घोष कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति और सामर्थ्य क्या है, और यहां का कण-कण वीरता और साहस का साक्षी है।
शौर्य सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देशभर से जुड़े लाखों श्रद्धालुओं को “जय सोमनाथ” कहकर संबोधित किया और इस अद्भुत वातावरण का वर्णन किया, जहां एक ओर देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रों की गूंज और आस्था का उफान इस आयोजन को भव्य और दिव्य बना रहा था। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस स्वाभिमान पर्व में सक्रिय सेवा का अवसर मिला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके साथ ही उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वहीं, 1299 ईस्वी में जफर खान के आक्रमण के दौरान सोमनाथ की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान मंदिर परिसर में विशेष ड्रोन और ऑडियो-विजुअल शो का आयोजन किया गया, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक और रोशनी के माध्यम से अध्यात्म और इतिहास के महत्वपूर्ण प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया गया। ड्रोन के अद्भुत समन्वय से आकाश में “अखंड सोमनाथ, अखंड भारत” लिखा गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने 72 घंटे तक चलने वाले मंत्र जाप में भी सहभागिता की और दर्शन-पूजन किया। यह पूरा आयोजन श्रद्धा, गौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।






