अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने बदला सियासी तापमान

संदीप सक्सेना
देश की राजनीति में एक बार फिर हिंदुत्व के पुराने चेहरे की वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हिंदू हृदय सम्राट, भाजपा के फायर ब्रांड नेता, पांच बार के सांसद और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार के पूर्ण सक्रिय राजनीति में दोबारा लौटने की अटकलों ने उनके समर्थकों में नई ऊर्जा भर दी है। जैसे ही यह चर्चा सोशल मीडिया पर फैली, पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में उनके समर्थकों—विशेषकर सजातीय समाज—में जयकारे और समर्थन संदेशों की बाढ़ आ गई।
सूत्रों और राजनीतिक हलकों में यह बात जोर पकड़ रही है कि विनय कटियार अयोध्या से अगला विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। अयोध्या केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि हिंदुत्व की राजनीति का प्रतीकात्मक केंद्र है। राम मंदिर आंदोलन में विनय कटियार की भूमिका को देखते हुए यह चर्चा स्वाभाविक रूप से सियासी मायने बढ़ा देती है। समर्थकों का मानना है कि अयोध्या से उनका चुनावी मैदान में उतरना हिंदुत्व एजेंडे को नई धार दे सकता है।
जहां एक ओर हिंदुत्व समर्थकों में इस खबर को लेकर खुली खुशी देखी जा रही है, वहीं राजनीतिक विरोधियों के खेमे में बेचैनी साफ झलक रही है। विरोधियों को आशंका है कि विनय कटियार की सक्रिय वापसी से चुनावी ध्रुवीकरण तेज हो सकता है और पुराने मुद्दे फिर से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ सकते हैं।
हालांकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी विनय कटियार को आगे करती है तो यह अनुभव, प्रतीकवाद और संगठनात्मक पकड़—तीनों का संतुलन साधने की कोशिश होगी। यह कदम पार्टी के कोर वोटबेस को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भर सकता है।
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं से यह साफ है कि विनय कटियार आज भी अपने समर्थकों के बीच भावनात्मक और वैचारिक प्रभाव रखते हैं। पोस्ट, वीडियो और संदेशों में उन्हें “हिंदुत्व की आवाज़” के रूप में पेश किया जा रहा है, जो बताता है कि उनकी वापसी की संभावना मात्र ने ही राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
फिलहाल यह सब चर्चाओं और कयासों तक सीमित है, लेकिन इतना तय है कि यदि विनय कटियार सक्रिय राजनीति में पूरी तरह लौटते हैं और अयोध्या से चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से हलचल पैदा करेगा। समर्थकों के उत्साह और विरोधियों की चिंता—दोनों ही संकेत दे रहे हैं कि यह वापसी साधारण नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से निर्णायक हो सकती है।

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