वोट कटौती से लेकर महिला सुरक्षा तक—सरकार के दावों की कसौटी
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तीखे सवालों के घेरे में है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ में हुई प्रेसवार्ता के माध्यम से न केवल वोटर लिस्ट संशोधन की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियाँ उठाईं, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था—विशेषकर महिला सुरक्षा—को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
वोटर लिस्ट पर भरोसे का संकट
अखिलेश यादव का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम काटे जा रहे हैं और यह प्रक्रिया किसी प्रशासनिक त्रुटि से नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने के बाद उनकी आशंकाएँ और गहरी हुई हैं। सवाल यह है कि यदि सार्वजनिक मंचों से पहले ही करोड़ों वोट कटने की बात कही जा रही थी, तो आम नागरिक और विपक्ष को इसकी पारदर्शी जानकारी क्यों नहीं दी गई? लोकतंत्र की बुनियाद मताधिकार पर टिकी होती है; ऐसे में किसी भी तरह की अस्पष्टता या पूर्वाग्रह, जनविश्वास को कमजोर करता है।
सपा अध्यक्ष ने वोटर लिस्ट का आधार से मिलान कराने और भारत निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग रखी। यह मांग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता से भी जुड़ी है। चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता, किसी भी लोकतंत्र के लिए अनिवार्य शर्त है—और इस कसौटी पर सरकार व आयोग दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर अखिलेश यादव ने सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे को खोखला बताया। मेरठ में मां पर कातिलाना हमला और बेटी के अपहरण जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता के संकेत हैं। यदि महिलाएं और बेटियां सुरक्षित नहीं, तो विकास और सुशासन के दावे महज़ भाषण बनकर रह जाते हैं।
सपा का आरोप है कि मौजूदा शासन में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर हैं, जबकि सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी अपने प्रचार में कानून-व्यवस्था को उपलब्धि के रूप में पेश करता है। संपादकीय दृष्टि से यह टकराव बताता है कि शासन के दावों की स्वतंत्र और तथ्यपरक समीक्षा जरूरी है—केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर।
अखिलेश यादव की यह चेतावनी कि जनता 2027 में सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी, राजनीतिक बयान भर नहीं है। यह उस असंतोष का संकेत भी है, जो मतदाता सूची की विश्वसनीयता और नागरिक सुरक्षा जैसे मूल मुद्दों से उपजता है। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है, लेकिन उस फैसले तक पहुँचने की प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित हो—यही आज की सबसे बड़ी मांग है।
उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट संशोधन और महिला सुरक्षा—दोनों मुद्दे सरकार के लिए परीक्षा हैं। पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता के बिना भरोसा बहाल नहीं होगा। लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं, बल्कि निष्पक्ष प्रक्रियाओं और सुरक्षित समाज से मजबूत होता है।






