लखनऊ| विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के तहत आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है। पहले दो दिनों में दर्ज की गई कुल आपत्तियों और दावों में करीब 95 प्रतिशत भाजपा की ओर से दाखिल किए गए हैं। इसकी बड़ी वजह SIR को लेकर पार्टी के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व की गंभीर चिंता और सख्त रुख बताया जा रहा है। बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने के बाद पार्टी ने इसे राजनीतिक तौर पर बेहद अहम मानते हुए इसे शीर्ष प्राथमिकता में शामिल कर लिया है।
शुरुआती चरण में जब SIR के दौरान हजारों मतदाताओं के नाम सूची से हटने की जानकारी सामने आई, तो पार्टी नेतृत्व ने इसे खतरे की घंटी माना। खासतौर पर विधायकों और मंत्रियों की भूमिका को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह साफ कर दिया गया है कि कौन विधायक और मंत्री इस प्रक्रिया में कितना सक्रिय है, इसकी नियमित रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व तक भेजी जा रही है। इन रिपोर्टों के आधार पर उनका ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार किया जाएगा, जिसमें SIR में प्रदर्शन को अहम पैमाना माना जाएगा। संकेत साफ हैं कि यदि किसी ने इस काम में ढिलाई बरती, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में उसके लिए टिकट की राह आसान नहीं होगी।
भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व शुरुआत से ही SIR को लेकर बेहद गंभीर रहा है। इसके लिए लगातार बैठकें, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। पार्टी के कार्यकर्ताओं से लेकर मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों तक की जिम्मेदारियां तय की गईं। इसके बावजूद जब यह सामने आया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कट गए हैं, तो प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व ने खुलकर चिंता जताई। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मंचों से इस मुद्दे पर नाराजगी और चिंता जता चुके हैं।
कुछ दिन पहले हुई एक कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को साफ शब्दों में चेताया था कि यदि वे SIR को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, तो यह उनके राजनीतिक भविष्य के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। उन्होंने निर्देश दिए थे कि सभी अन्य काम छोड़कर दावे और आपत्तियों के काम में पूरी ताकत से जुट जाएं। पिछली बैठक में मुख्यमंत्री ने उन विधानसभाओं के नाम भी गिनाए थे, जहां सबसे ज्यादा वोट कटे हैं। इनमें लखनऊ कैंट, लखनऊ उत्तरी, लखनऊ दक्षिणी, हरदोई, मिल्कीपुर, आगरा दक्षिणी और लखीमपुर जैसी विधानसभा सीटें शामिल हैं।
पार्टी की चिंता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि सबसे ज्यादा मतदाता कटौती शहरी इलाकों में हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ में सबसे अधिक 30.04 प्रतिशत वोट कटे हैं। इसके अलावा गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत, कानपुर नगर और बलरामपुर में 25.98 प्रतिशत, मेरठ में 24.65 प्रतिशत, प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 23.25 प्रतिशत, हापुड़ में 22.30 प्रतिशत और आगरा में 23.25 प्रतिशत वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर मतदाता कटौती के बाद पार्टी नेतृत्व ने आपत्तियों और दावों पर पूरा फोकस कर दिया है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि SIR की कड़ी निगरानी की जा रही है और खासतौर पर विधायकों की सक्रियता पर पैनी नजर है। पार्टी पदाधिकारियों से उनके कामकाज को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है। विधायकों को यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि अगर वे मतदाता सूची को दुरुस्त कराने में गंभीरता नहीं दिखाते, तो 2027 में उन्हें टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि अधिक से अधिक योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए दावे और आपत्तियों का काम युद्ध स्तर पर किया जाए, ताकि आगामी चुनावों से पहले पार्टी को किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

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