लखनऊl आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है। मकर संक्रांति के बाद पार्टी में जिलों से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक आमूल-चूल फेरबदल देखने को मिलेगा। सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीति के तहत यह कदम उठाने का फैसला किया है, ताकि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत किया जा सके।
पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार कई जिलों में मौजूदा जिलाध्यक्षों को हटाया जाएगा, खासकर उन जिलों में जहां संगठनात्मक गतिविधियों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अन्य पार्टी कार्यक्रमों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। सपा नेतृत्व अब ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जो संगठन और चुनावी कामकाज में पूरी तरह सक्रिय रहे हैं।
सपा अध्यक्ष के करीबी सूत्र बताते हैं कि एक-तिहाई से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों को अभी से जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इन नेताओं को एसआईआर समेत सभी चुनावी तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए गए हैं। इसे टिकट फाइनल करने की शुरुआती प्रक्रिया माना जा रहा है, ताकि उम्मीदवारों को पर्याप्त समय मिल सके और वे बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत कर सकें।
पार्टी की रणनीति के तहत सभी प्रमुख जातियों को संतुलित तरीके से प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा रहा है। चूंकि किसी एक जिले में सभी प्रमुख जातियों को टिकट देना संभव नहीं होता, इसलिए सपा ने तय किया है कि कुछ जातियों को टिकट के माध्यम से तो कुछ को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर साधा जाएगा। मकर संक्रांति के बाद प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की कमेटियों में भी नई नियुक्तियां होंगी, जिनमें विभिन्न जातियों के नेताओं को स्थान मिलेगा।
इसके अलावा जिन जिलों में किसी खास जाति के नेता को टिकट देने की योजना है, वहां संगठन में अन्य जातियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रमुख भूमिका दी जाएगी, ताकि संतुलन बना रहे और जनाधार मजबूत हो। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मकर संक्रांति के बाद पार्टी संगठन का स्वरूप बदला हुआ नजर आएगा और यह बदलाव पूरी तरह चुनावी रणनीति के अनुरूप होगा।

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