मेरठ: मेरठ (Meerut) जिले के सरधना थाना क्षेत्र के अंतर्गत कपसाद गांव में अपहरण (kidnappers) और हत्या की घटना से दहशत फैल गई है। यहां एक 45 वर्षीय महिला की हत्या उस समय हो गई जब वह अपनी 20 वर्षीय बेटी को कुछ युवकों द्वारा अपहरण किए जाने से बचाने की कोशिश कर रही थी। घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद से ही आरोपियों के परिवार वाले फरार हैं, जबकि पुलिस ने उनके दादा-दादी को पूछताछ के लिए सरधना थाना में हिरासत में लिया है।
पुलिस के अनुसार, कपसाद निवासी सुनीता गुरुवार को अपनी बेटी के साथ खेत में काम करने जा रही थी, तभी गांव के दो युवक उसके पास आए। युवकों ने सुनीता से कुछ देर बात की और कथित तौर पर सुनीता की बेटी का अपहरण करने का प्रयास किया। जब सुनीता ने विरोध किया, तो उनमें से एक ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। सुनीता के शोर मचाने पर पास में काम कर रहे लोग मौके पर पहुंचे।
हालांकि, आरोपी सुनीता की बेटी का अपहरण करने में कामयाब रहे। हमले में गंभीर रूप से घायल सुनीता को मोदीपुरम के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। सुनीता के परिवार ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने जातिवादी गालियां दीं और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
मेरठ एसएसपी विपिन टाडा ने बताया कि आरोपियों में से एक और सुनीता एक-दूसरे को पहले से जानते थे। उन्होंने कहा कि सुनीता की बेटी को बचाने और आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
घटना के बाद गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। खबरों के अनुसार, जब सुनीता के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था, तब ग्रामीणों ने भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के सदस्यों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया और एम्बुलेंस में तोड़फोड़ की।
आज़ाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष चरण सिंह ने कहा कि अगर पुलिस 48 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं करती और लड़की को नहीं बचाया जाता, तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति के लिए पुलिस और प्रशासन जिम्मेदार होंगे। इसी बीच, सरधना के विधायक और सपा नेता अतुल प्रधान अस्पताल पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से बात करते हुए सुनीता के परिवार को न्याय दिलाने का आग्रह किया।


