यूथ इंडिया
भारत को यदि दुनिया का सबसे बड़ा युवा राष्ट्र कहा जाए, तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा युवाओं का है और यही युवा शक्ति भारत के भविष्य की दिशा, दशा और पहचान तय करने वाली है। इतिहास गवाह है कि जब-जब युवाओं ने जिम्मेदारी संभाली है, तब-तब समाज और राष्ट्र में बड़े परिवर्तन हुए हैं।
आज का युवा केवल रोजगार की तलाश करने वाला वर्ग नहीं रह गया है। वह नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक, सामाजिक आंदोलन और वैचारिक बदलाव का सक्रिय वाहक बन चुका है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, सामाजिक उद्यमिता और नए विचारों की प्रयोगशाला आज का युवा ही है। गांव से लेकर महानगर तक, हर क्षेत्र में युवा नई सोच और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।हालांकि इस उज्ज्वल तस्वीर के पीछे कई गंभीर चुनौतियां भी छिपी हैं। बेरोजगारी, सीमित अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव और बार-बार होने वाली भर्तियों में देरी युवाओं को मानसिक रूप से थका रही है। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी वर्षों तक नौकरी की प्रतीक्षा युवाओं के आत्मविश्वास को तोड़ देती है। इसके साथ ही मानसिक तनाव, अवसाद और असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ रही है, जिस पर समाज और सरकार—दोनों को गंभीरता से ध्यान देना होगा।युवा तभी राष्ट्र की असली ताकत बन सकता है, जब उसे शिक्षा के साथ अवसर, भरोसे के साथ जिम्मेदारी और अधिकार के साथ भागीदारी मिले। नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को केवल जनसंख्या का आंकड़ा न मानें, बल्कि उन्हें नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया का सहभागी बनाएं। जब युवा खुद को सुना हुआ और सम्मानित महसूस करेगा, तभी उसकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगेगी।
आज जरूरत है ऐसे वातावरण की, जहां युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला, अनुयायी नहीं, नेतृत्वकर्ता और मौन दर्शक नहीं, परिवर्तन का सूत्रधार बने। यदि भारत अपने युवाओं की शक्ति को सही दिशा दे सका, तो आने वाला समय न केवल भारत का होगा, बल्कि भारत दुनिया को दिशा देने वाला राष्ट्र बनेगा।
निष्कर्षतः, युवा केवल भविष्य नहीं हैं—युवा ही भारत का वर्तमान हैं, और यही वर्तमान आने वाले कल की सबसे मजबूत नींव है।

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