ज्ञान डेरी के संस्थापक ने शिक्षा, सेवा और संस्कार से रची नई मिसाल

कायमगंज (फर्रुखाबाद)। व्यापार के साथ समाजसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने वाले सत्यप्रकाश अग्रवाल आज केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि गरीबों के मसीहा और कलयुग के दानवीर के रूप में पहचाने जाते हैं। ज्ञान डेरी के संस्थापक के रूप में उन्होंने जहां उद्योग जगत में पहचान बनाई, वहीं समाज के कमजोर वर्गों के लिए उम्मीद की किरण भी बने।
जिसके द्वार पर हर जरूरतमंद की अरदास होती है पूरी
स्थानीय लोगों के अनुसार, सत्यप्रकाश अग्रवाल का दरवाज़ा कभी भी किसी जरूरतमंद के लिए बंद नहीं रहता। बीमारी, शिक्षा, बेटी की शादी या रोज़मर्रा की परेशानियाँ—हर समस्या को वे मानवीय संवेदना के साथ सुनते और यथासंभव समाधान करते हैं। इसी कारण समाज के हर वर्ग में उनके प्रति गहरा भरोसा और सम्मान है।
समाज की जड़ में बदलाव शिक्षा से ही आता है—इस सोच को ज़मीन पर उतारते हुए सत्यप्रकाश अग्रवाल ने सीपी इंटरनेशनल स्कूल की श्रृंखला के माध्यम से एक नई मिसाल कायम की है।
इस विद्यालय समूह में जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है, ताकि गरीबी किसी बच्चे के सपनों के आड़े न आए। किताबें, पढ़ाई का माहौल और संस्कार—सब कुछ देकर वे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह स्कूल उनके बच्चों के लिए सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि उजले भविष्य की नींव है।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। अब तक 65 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार उनके सहयोग से कराया जा चुका है और यह कार्य लगातार जारी है। मंदिरों में स्वच्छता, प्रकाश और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
ज्ञान डेरी के जरिए उन्होंने न केवल रोजगार के अवसर सृजित किए, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि उद्योग का असली धर्म समाज के प्रति जवाबदेही निभाना है। उनके अनुसार, व्यापार से अर्जित लाभ का सार्थक उपयोग तभी है, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
सत्यप्रकाश अग्रवाल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची संपत्ति धन नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और संस्कार हैं।कायमगंज-फर्रुखाबाद ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में उनका नाम आज निस्वार्थ सेवा का पर्याय बन चुका है।
यही वजह है कि लोग श्रद्धा से कहते हैं,“सत्यप्रकाश अग्रवाल शिक्षा, सेवा और संस्कार के साथ कलयुग के सच्चे दानवीर।”

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