प्रशांत कटियार

भारतीय राजनीति में पिछड़े वर्गों, दलित समाज और महिलाओं के अधिकारों के लिए लगातार आवाज़ उठाने वाली अनुप्रिया पटेल आज न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की एक प्रभावशाली नेता के रूप में पहचानी जाती हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद, अनुप्रिया जी हमेशा अपने हक की आवाज़ बुलंद करती रही हैं। उनका यह संघर्ष यह साबित करता है कि किसी के बहकावे में आए बिना अपनी नेता की ताकत को पहचानना और अपने अधिकारों की रक्षा करना कितना महत्वपूर्ण है।
अनुप्रिया पटेल ने संसद और पार्टी के भीतर कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं, जिन्होंने समाज के पिछड़े और दलित वर्ग, युवाओं और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत किया है। एनडीए की बैठक में 13 पॉइंट रोस्टर प्रणाली का विरोध कर इसे समाप्त कराना, उनके राजनीतिक साहस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण बहाल कराया, नवोदय और सैनिक विद्यालयों में 27 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित कराया और ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलवाया।
महिला अधिकारों के क्षेत्र में भी अनुप्रिया जी अग्रणी रही हैं। उन्होंने संसद में महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा उठाया और सुनिश्चित किया कि महिलाओं को समान अवसर मिलें। उनके अथक प्रयासों से प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज और फूलपुर-सोराव मार्ग अब डॉ. सोनेलाल पटेल जी के नाम से प्रसिद्ध हैं, जो उनके दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण हैं। उन्होंने बच्चों के पाठ्यक्रम में वीरांगना उदादेवी पासी जी की वीरता की पूरी कहानी शामिल कराकर इतिहास को जीवंत बनाया और युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाई।
अनुप्रिया जी ने NEET में आरक्षण की सर्वप्रथम मांग उठाई और इसे सफलतापूर्वक सुनिश्चित कराया। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी राजा जयलाल सिंह जी के सम्मान में डाक टिकट जारी करवाने का प्रयास किया। उन्होंने ओबीसी क्रीमीलेयर की आय सीमा बढ़ाने, लेखपाल भर्ती में आरक्षण सुनिश्चित करने और जातिवार जनगणना के मुद्दे संसद में उठाकर पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा की।
वह ओबीसी के लिए अलग मंत्रालय की मांग में अडिग हैं और न्यायपालिका में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी लगातार उठाती रही हैं। कृषि को उद्योग का दर्जा देने, चौरसिया समाज के लिए पान को कृषि दर्जे में रखने और प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग उनके व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उन्होंने डोम, चौरसिया और नाई समाज की समस्याओं को संसद में उठाकर यह दिखाया कि वे समाज के सबसे कमजोर वर्गों की आवाज़ भी हैं।
अनुप्रिया पटेल की सक्रिय भूमिका यह संदेश देती है कि किसी भी समाज या वर्ग के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करना और अपनी नेता की ताकत को पहचानना कितना जरूरी है। उनके नेतृत्व और समाज सेवा के प्रयास युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। उनका जीवन और कार्य न केवल सम्मान और अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल भी प्रस्तुत करता है।

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